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बंद प्रसव कक्ष के बाहर डेढ़ घंटे तक दर्द से छटपटाती रही प्रसूता, हंगामे के बाद ऑन कॉल पहुंचीं डॉक्टर

Katihar News - सदर अस्पताल की कुव्यवस्था की एक अाैर बानगी रविवार काे कटिहार में देखने काे मिली। चंद घंटे पूर्व बच्चे को जन्म दी...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:01 AM IST
Katihar News - outside the closed delivery room the maternity kept sparring with pain for one and a half hours the doctor arrived on call after an uproar
सदर अस्पताल की कुव्यवस्था की एक अाैर बानगी रविवार काे कटिहार में देखने काे मिली। चंद घंटे पूर्व बच्चे को जन्म दी महिला काे जब पीएचसी से रेफर कर सदर अस्पताल भेजा गया तो यहां उसे बंद प्रसव गृह के बाहर डेढ़ घंटे तक बेहोशी की हालत में रहना पड़ा। जानकारी के अनुसार आजमनगर पीएचसी में काजीपाड़ा गांव के मजहर अली की प|ी नूजहत खातून ने अल सुबह एक बच्चे को जन्म दिया।

स्वास्थ्य केंद्र ने नूजहत खातून की स्थिति को देखते हुए उसे कटिहार सदर अस्पताल रेफर कर दिया। पति मजहर अली और सास गुलेशा खातून का कहना है कि लगभग साढ़े 9 बजे वे लोग अस्पताल के प्रसव वार्ड में पहुंचे। ड्यूटी पर तैनात नर्स कुमकुम ने बिना देखे उसे अविलम्ब वहां से ले जाने को कहा। उसने सास गुलेशा को कहा कि आज रविवार है डॉक्टर नहीं हैं। आप यहां से जल्दी ले जाइये। सास गुलेशा और मजहर अली की मानें तो अस्पताल कर्मियों ने जबरन उसे प्रसव परिसर से बाहर कर दिया। एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराया। जिसके बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया।

महिला डॉक्टर ने स्थिति को देख सदर अस्पताल से प्रसूता को मेडिकल कॉलेज किया रेफर

आक्रोशित परिजनों को समझातीं महिला चिकित्सक।

प्रसव वार्ड में ऑन कॉल बुलाई जातीं हैं महिला डॉक्टर

अस्पताल में पहुंचे रोगियों के परिजन निर्मला देवी, मीरा देवी, मनोहर कुमार, आजाद सिंह, हरीश कुमार आदि का कहना है कि अस्पताल में विशेष परिस्थिति पर ही महिला चिकित्सक पहुंचती हैं। शनिवार की दोपहर के बाद पूरा रविवार तक डॉक्टर नदारद रहते हैं। बहरहाल आज की स्थिति को देखते हुए नूजरत खातून के परिजनों और आमलोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ आक्रोश और असंतोष जताया। इनलोगों का कहना था कि प्रसव वार्ड में 24 घंटे महिला डॉक्टर उपलब्ध रहना चाहिए। ऑन कॉल डॉक्टर आने की परम्परा समाप्त होने से ही लोगों की परेशानी दूर होगी।

प्रसव कक्ष के बाहर बेहोश पड़ीं महिला।

आजमनगर पीएचसी में नहीं हुई खून की जांच

सिविल सर्जन का ध्यान दिलाने पर डॉक्टर अर्पणा पहुंची। उसका कहना था कि आजमनगर में महिला के खून की जांच नहीं की गई। अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण खून की कमी है। इतना ही नहीं महिला का ब्लड किस ग्रुप का है यह भी पता नहीं चल सका। इसलिए उसे रेफर कर दिया गया है।

सूचना मिलने पर भेजीं गईं डॉक्टर


कराहती रही प्रसूता, दादी के हाथ में रहा नवजात

लगभग डेढ़ घंटे अस्पताल के बाहर गेट पर महिला दर्द और बेहोशी में रही और परिजन इलाज की गुहार लगाते रहे। यहां तक कि इस अवधि में सास गुलेशा उस नवजात को अपने गोद में ही संभाले रखा। बाद में कुछ मीडिया कर्मी के हस्तक्षेप पर डॉक्टर अर्पणा पहुंची और स्थिति को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। व्यवस्था का आलम यह रहा कि लगभग डेढ़ घंटे तक लावारिश स्थिति में महिला और उसका नवजात रहा। सास गुलेशा का कहना था कि अस्पताल में डॉक्टर नहीं और स्वास्थ्य कर्मियों ने कोई नोटिस नहीं लिया। नर्स कुमकुम का कहना था कि रविवार है और महिला डॉक्टर इमरजेंसी होने पर ऑन कॉल बुलाई जातीं हैं। नर्स कुमकुम ने बताया कि स्थिति गम्भीर थी इसलिए महिला डॉक्टर को नहीं बुलाया गया। परिजनों का कहना है कि नर्स ही बिना देखे रेफर कर दिया।

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