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नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की... पर झूमे श्रद्धालु

एक वर्ष पहले
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सैदपुर में चल रहे 9 दिवसीय श्रीमद्भागवत अमर कथा के छठे दिन रविवार को संपन्न हुआ। संगीतमय कथा के दौरान राघवेंद्र शास्त्री द्वारा गाये गये “नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” भजन पर श्रद्धालुओं ने मंग्नमुग्ध होकर झूमते नजर आये। वहीं आचार्य लक्ष्मीकांत शुक्ल ने पूजन कराया। हारमोनियम पर संजय चतुर्वेदी, आर्गन पर कृपा शंकर, तबला पर हौसला, पैड पर अमरजीत ने संगत किया एवं लक्ष्मण दास ने आरती भ्रमण कराया तथा सिंथेसाइजर पर चंद्रकांत चंदू ने संगत किया। कथा के पश्चात पंचतत्व प्रसाद का वितरण किया गया। केरल से आए हुए कथा वाचक पंडित राघवेंद्र शास्त्री ने कथा प्रेमियों को कहा कि भगवान कृष्ण कंस के कारागार में प्रकट हुए।

वासुदेव और देवकी के आठवां पुत्र बनकर भगवान ने अपनी लीला की शुरुआत की। वसुदेव देवकी मनुष्य के प्राण और बुद्धि हैं। मनुष्य के शरीर में प्राण स्वयं चैतन्य स्वरूप है लेकिन बुद्धि सबकी भिन्न-भिन्न है। जिसकी बुद्धि संसार में रहती है उसको संसार की वस्तुओं की प्राप्ति होती है और जिसकी बुद्धि में देव में(देवकी) होती है उनको आनंद की प्राप्ति होती है और उसी आनंद को कृष्ण कहते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान भले ही देवकी से प्रकट हुए परंतु योद्धा के घर पले बढ़े थे। शास्त्र के हिसाब से जो हर चीज में हर परिस्थिति में भगवत कृपा को महसूस करते हैं ऐसे स्वभाव को यशोदा कहते हैं, लेकिन समाज का दुर्भाग्य यह है कि कार्य पूर्ण होने पर अपने आप को और कार्य बिगड़ने पर लोग भगवान को दोष देते हैं। जबकि सच्चा भक्त हर परिस्थिति में भगवान को ही कर्ता-धर्ता मानता है।

सैदपुर में चल रहे 9 दिवसीय श्रीमद‌्भागवत अमर कथा में मौजूद श्रद्धालु।
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