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इंद्रियों पर विजय पाने वाला ही परम तत्व को पाता है : दुर्गेश नंदन महाराज

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 04:31 AM IST

Khagaria News - भास्कर न्यूज | परबत्ता प्रखंड के रामपुर उर्फ रहीमपुर पंचायत अंतर्गत मोजाहिदपुर गांव में राधा रानी सेवा ट्रस्ट...

Parbatta News - only the one who conquers the senses finds the ultimate element durgesh nandan maharaj
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भास्कर न्यूज | परबत्ता

प्रखंड के रामपुर उर्फ रहीमपुर पंचायत अंतर्गत मोजाहिदपुर गांव में राधा रानी सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को मुख्य कथावाचक दुर्गेश नंदन महाराज ने शुकदेव जी द्वारा परीक्षित को कथा सुनाने का का वर्णन किया।

उन्होंने सबसे पहले आसन को जीतने तथा श्वास पर नियंत्रण करने का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की 10 इन्द्रियों में में पांच कर्म इन्द्रियां एवं पांच ज्ञान इन्द्रियों को वश में करने वाला ही परम तत्व को प्राप्त होता है। उन्होंने राजा परीक्षित व शुकदेव महाराज की प्रश्नोत्तरी में सृष्टि के जन्म की कथा सुनाई।

दुर्गेशनंदन महाराज के साथ आए आचार्य शिवम दास महाराज तथा विवेक शर्मा ने अपने मंत्रोच्चार से यज्ञ स्थल के माहौल को पवित्र बना दिया। भागवत कथा के बीच-बीच में भगवत भजन से पंडाल में बैठे हजारों श्रद्धालु झूमते और भक्तिसागर में गोते लगाते रहे।

कथा श्रवण के बाद मेला में लगती है भीड़

इस भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में कथा श्रवण को लेकर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के समापन के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ पंचायत भवन परिसर में लगाये गये मेले में लग जाती है। इस मेले में लगाये गये मीना बाजार में महिलाओं की भीड़ लगी रहती है। इसके साथ ही ब्रेक डांस तथा कई प्रकार का झूला बच्चों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

मित्रता कैसे निभाई जाए यह श्रीकृष्ण व सुदामा से सीखें

कथा में जुटी भीड़।

भास्कर न्यूज | चौथम

चौथम प्रखंड अंतर्गत नौरंगा में 17 मार्च तक चलने वाली श्री श्री 1008 विष्णु महायज्ञ में शनिवार को भागवत कथा के सातवें दिन भगवान कृष्ण और सुदामा की कथा सुनाई गई। मौके पर राधे-राधे के नारों से माहौल भक्तिमय हो गया। वहीं मंत्रोच्चारण के बीच पुरोहितों द्वारा कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई। कथा में पंडित रामाशंकर मिश्र ने प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण और सुदामा से समझ सकते हैं। श्रीकृष्ण महाराज होते हुए भी निर्धन सुदामा के पैर धोते हैं और उनके द्वारा लाए गए चावल को चाव से ग्रहण करते हैं। मित्रता व अहंकारहीनता का इससे बड़ा उदाहरण दुनिया में और कहीं नहीं है। इधर यज्ञ स्थल पर झूला, मीना बाजार का आयोजन किया गया है।

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