कल सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी कार्तिक पूर्णिमा

Kishanganj News - कार्तिक मास की पूर्णिमा का दिन बेहद खास होता है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 12...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:05 AM IST
kishanganj News - kartik purnima will be celebrated tomorrow in sarvadhi yoga
कार्तिक मास की पूर्णिमा का दिन बेहद खास होता है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर मंगलवार को है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है जिसमें स्नान-दान का महत्व बढ़ जाएगा। वैसे भी कार्तिक मास की पूर्णिमा का खास महत्व होता है और इस बार तो इसका महत्व ग्रह और नक्षत्र से बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित भस्कर मिश्र ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा भरणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रह-गोचरों के शुभ संयोग में मनाई जाएगी। भारतीय संस्कृति में कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महात्म्य है। कार्तिक पूर्णिमा को काशी में देवताओं की दीपावली के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कई धार्मिक आयोजन, पवित्र नदी में स्नान, पूजन और दान का विधान है। ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा तिथि पर स्नान और दान से भगवान विष्णु की अपार कृपा बरसती है। मान्यता है कि इस तिथि पर गंगा स्नान से पापों से मुक्ति मिलती है और काया भी निरोगी रहती है। साथ ही पुण्य स्नान से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त पंचाग के मुताबिक 12 नवंबर दिन मंगलवार को पूर्णिमा रात्रि 7.13 बजे तक है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 :12 बजे से 11: 55 बजे तक है। उदया तिथि के मान से पूरे दिन पूर्णिमा तिथि का मान रहेगा और पूरे दिन गंगा स्नान और विष्णु पूजन होंगे।

कार्तिक पूर्णिमा पर किया जाता है दीपदान

वहीं कार्तिक पूर्णिमा पर अखण्ड दीप दान करने से दिव्य कान्ति की प्राप्ति होती है साथ ही जातक को धन, यश, कीर्ति में भी लाभ होता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के बाद दीप-दान करना दस यज्ञों के समान फलदायक होता है। कार्तिक पूर्णिमा देवों की उस दीपावली में शामिल होने का अवसर देती है।

महादेव ने अर्धनारीश्वर के रूप में त्रिपुरासुर का किया था वध

त्रिपुरासुर नाम के दैत्य के आतंक से तीनों लोक भयभीत थे। उसने स्वर्ग लोक पर भी अधिकार जमा लिया था। त्रिपुरासुर ने प्रयाग में काफी दिनों तक तप किया था। उसके तप से तीनों लोक जलने लगे। तब ब्रह्मा जी ने उसे दर्शन दिया, त्रिपुरासुर ने उनसे वरदान मांगा कि उसे देवता, स्त्री, पुरुष, जीव, जंतु, पक्षी, निशाचर न मार पाएं। इसी वरदान से त्रिपुरासुर अमर हो गया और देवताओं पर अत्याचार करने लगा। कार्तिक पूर्णिमा के दिन महादेव ने प्रदोष काल में अर्धनारीश्वर के रूप में त्रिपुरासुर का वध किया था।

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