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जीपीएस ट्रैकर, ल्यूमिनियस जैकेट और अाधुनिक उपकरणाें से लैस रेलकर्मी आने वाले मानसूनी अापदाअाें का करेंगे मुकाबला, एनफ रेलवे ने शुरू की तैयारी

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:10 AM IST

Kishanganj News - दो वर्ष पूर्व एनएफ रेलवे आई बाढ़ से रेलवे को 800 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था। इस नुकसान का सबसे बड़ा कारण कटिहार...

kishanganj News - railroads equipped with gps tracker luminous jacket and modern equipment will be tackled by monsoon apads nf railway ready to start
दो वर्ष पूर्व एनएफ रेलवे आई बाढ़ से रेलवे को 800 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था। इस नुकसान का सबसे बड़ा कारण कटिहार डिवीज़न के दालकोला-किशनगंज सेक्शन पर स्थित तेलता रेल ब्रिज का बह जाना था, जिसकी वजह से पूरे देश का रेल संपर्क पूर्वोत्तर भारत से एक महीने से अधिक समय तक के लिए कटा रहा। आने वाले मॉनसून में ऐसा न हो इसके लिए एनएफ रेलवे ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए है। जीपीएस ट्रैकर, ल्यूमिनियस जैकेट, रेनकोट तथा वाटरप्रूफ ट्राउजर, खनन बत्ती लगे हुए सेफ्टी हेल्मेट, सेफ्टी शू जैसे अत्यानुधिक उपकरणाें से लैस गश्ती दल मानसूनी अापदाअाें का मुकाबला करेंगे। रेल की पटरियों को सुरक्षित रखने के लिए गश्ती दलों की 813 पार्टियां (प्रत्येक में दो व्यक्ति शामिल) नियुक्त की गई है, जाे 15 अक्टूबर तक गश्त करेगी। एनएफ रेल के संपूर्ण क्षेत्राधिकार में पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल तथा बिहार में फैले हुए 6400 किमी से ज्यादा रेल की पटरियों पर कर्मचारियों को तैनात करना शुरू किया गया है।

मानसून के दौरान अापदाअाें से निपटने के लिए भारी संख्या में की कर्मचारियों की तैनाती, पटरियों को सुरक्षित रखने के लिए गश्ती दलों की हुई नियुक्ति

तटबंधों में दरार व पुलों का बहना मुख्य समस्या

एनएफ रेलवे के सीपीआरओ प्रणव ज्योति शर्मा बताते है कि मानसून का मौसम एनएफ रेलवे के लिए काफी चुनौती पूर्ण होता है, क्योंकि इसकी रेल की पटरियां ऐसे क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें समतल तथा पहाड़ी क्षेत्र हैं और ये मिट्टी इतनी स्थिर नहीं हैं। प्रत्येक वर्ष अप्रैल से अक्टूबर के अंत तक दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के कारण समस्या और बढ़ जाती है। जलजमाव के कारण ट्रैक खिसकने लगते है। मॉनसून में इस क्षेत्र में कुल वार्षिक बरसात का 90 प्रतिशत (2000 से 5000 मिमी तक) बारिश होती है। भूस्खलन, तटबंधों में दरार, पुलों के बह जाने के रूप में चुनौतियां सामने आती है। उन्हाेंने बताया यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी रूप में समझौता नहीं करने के लिए रेल पटरियों को सुरक्षित तथा अच्छी दशा में बरकरार रखने के लिए एक विस्तृत रणनीति बनाई गई है।

जीपीएस ट्रैकर से हाेगी निगरानी

मानसून से पूर्व तैयारी के तौर पर ज़रूरी मेंटेनेंस सामग्रियों को स्टॉक करना, जलनिकासी नालियों की सफाई, पुलों में खतरनाक जलस्तरों का चिन्हितकरण सुनिश्चित करने का कार्य पूरा किया जा चुका है। मौसम विभाग द्वारा जारी बारिश संबंधी सूचना के आधार पर भी गश्ती जारी रहेगी। रात के समय सम्पूर्ण पटरी 08 बजे से रात 11.30 बजे तक तथा रात 12.30 बजे से सुबह 04.00 बजे तक गश्ती लगाई जाएगी। ट्रेनों की आवाजाही के लिए खतरनाक हो सकने वाली किसी भी परिस्थिति की सूचना निकटवर्ती स्टेशन को प्रदान करने के लिए प्रत्येक गश्ती दल के पास एक वॉकी-टॉकी तथा मोबाइल फोन उपलब्ध कराया गया है। किसी भी स्टेशन के रवाना होने वाले ट्रेन के ड्राइवर को सतर्क करने के लिए गश्ती दलों के पास फॉग डिटोनेटर भी मुहैया कराया गया है। सभी रेल डिविजनों में कंट्रोल रूम बनाकर जीपीएस ट्रैकर की मदद से इन गश्ती दलों की निगरानी की जाती है।

162 जगहाें पर बनाए गए हैं स्टाॅक

शर्मा ने बताया कि पूर्ण सतर्कता के मानदंड अपनाने के वाबजूद कई बार पुल बह जाते हैं, तटबंध टूट जाते हैं एवं भूस्खलन होते हैं। इस तरह की परिस्थिति का सामना करने तथा न्यूनतम समय में रिपेयर कार्य के लिए सामग्रियों यानी बोल्डरों, रेत, रेत के बैग, पुलों की संरचना के विभिन्न उपकरण आदि के स्टॉकों को महत्वपूर्ण स्थानों पर वैगनों में तैयार रखा गया है। इस तरह के 235 वैगन तैयार रखे गए हैं तथा किसी भी समय आगे बढ़ने के लिए सम्पूर्ण जोन के 27 अलग-अलग स्थानों पर इन्हें रखा गया है। इसके अलावा अतिरिक्त स्टॉक को और 162 स्थानों पर तैयार रखा गया है।

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