25 साल में 34 गुना रकम देने का झांसा देकर निवेशकों से 20 करोड़ रुपए लेेकर फरार हो गया था शारदा बैंक

Kishanganj News - बंगाल की चिटफंड कंपनी शारदा ग्रुप के द्वारा गबन मामले में बिहार सरकार ने जांच की कमान सीबीआई को सौंपा है। जिससे...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 08:00 AM IST
kishanganj News - sarada bank escaped by taking rs 20 crores from investors by pretending to give 34 times the amount in 25 years
बंगाल की चिटफंड कंपनी शारदा ग्रुप के द्वारा गबन मामले में बिहार सरकार ने जांच की कमान सीबीआई को सौंपा है। जिससे लोगों में डूबे हुए पैसा वापस आने की आस जगी है। बैंक ने किशनगंज के हजारों लोगों की खून पसीने से कमाई करीब 20 करोड़ रुपए का गबन कर लिया था। मामला वर्ष 2013 का है। मामला इंटर स्टेट होने के कारण किशनगंज पुलिस को जांच में परेशानी हो रही थी। मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद लोगों को न्याय की उम्मीद बढ़ी है। दूसरी ओर किशनगंज पुलिस ने भी जांच के लिए जरूरी सभी आवश्यक दस्तावेज सीबीआई को सौंपने और हरसंभव सहयोग करने की बात कही है। किशनगंज के सर्किल इंस्पेक्टर इरशाद आलम सभी आवश्यक कागजात लेकर दिल्ली जाएंगे। जिसके बाद सभी कागजात सीबीआई को सौंपा जाएगा। एसपी कुमार आशीष ने इसकी पुष्टि की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरु की।

एजेंट सहित कई निवेशकों के बयान लिए गए। मामला सत्य पाया गया। लेकिन तब तक बंगाल सहित देश भर में कंपनी के खिलाफ हजारों केस दर्ज हो चुके थे। 266 केस तो सिर्फ बंगाल में दर्ज हुए। बंगाल में कंपनी के सीएमडी सुदीप्त सेन व देवयानी मुखर्जी गिरफ्तार हो चुके थे। किशनगंज पुलिस ने दोनों को इस कांड में रिमांड पर लाने के लिए आवेदन भी दिया। अन्य अभियुक्तों के गिरफ्तारी का प्रयास भी किया। दूसरी ओर बंगाल में यह मामला राजनीति के चक्कर में पड़कर पक्ष और विपक्ष का हो गया।

वर्ष 2013 का है मामला, बिहार सरकार ने गबन मामले की जांच की कमान सीबीआई को सौंपा

2008-09 में कंपनी ने लोगों को निवेश करने के लिए के लिए किया था प्रोत्साहित

शहर के इसी मार्केट कम्प्लेक्स में था शारदा बैंक का कार्यालय।

शहर के इसी मार्केट कम्प्लेक्स में था शारदा बैंक का कार्यालय।

लोगों को झांसे में लेकर पहले निवेश कराया फिर रातों रात बैंक में ताला लगाकर फरार हो गए थे कंपनी के कर्मी

कंपनी ने वर्ष 2008-09 से अपने बैंकों के माध्यम से कई तरह के झांसे देकर लोगों को अपनी रकम शारदा में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। कुछ दिनों बाद किशनगंज में भी वर्ष 2009-10 में शारदा बैंक की एक शाखा कलटैक्स चौक में खुली। युद्धस्तर पर कंपनी ने एजेंट बहाल किए। कुछ ही दिनों में एजेंट की संख्या एक हजार से अधिक हो गई। कंपनी के एजेंट सागौन से जुड़े बांड्स में निवेश पर रकम 25 साल में 34 गुणा और आलू के कारोबार में रकम निवेश करने पर 15 माह में दो गुना करने का भरोसा देने लगे। हजारों लोग इस आकर्षक स्कीम में फंसे। किशनगंज शाखा में ही निवेशकों के कई करोड़ रुपए जमा हुए। पुलिस जांच में भी 20 करोड़ रुपए से अधिक किशनगंज शाखा में जमा होने की पुष्टि हुई। पर वर्ष अप्रैल 2013 में कंपनी के दफ्तर में ताला लगाकर अधिकारी और कर्मचारी रातों रात फरार हो गए।

15 माह में दो गुना रुपए मिलता अगर आलू के कारोबार में लोग निवेश करते

बैंक में ताला लगने के बाद निवेशकों ने जब एजेंट को पकड़ना शुरू किया तो वे घर छोड़कर भाग गए, कई कर्मी दूसरे राज्य में भाग गए

कंपनी के फरार हो जाने की खबर शहर में आग की तरह फैल गई थी। निवेशक एजेंट को और एजेंट कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी को ढूंढने लगे। एजेंट स्थानीय थे जिनके घरों तक तगादा पहुंचने लगा। किशनगंज शहर महज तीन किलोमीटर के क्षेत्र में है एवं इसके तीन ओर पश्चिम बंगाल का बड़ा हिस्सा है। निवेशक और एजेंट बड़ी संख्या में समीपवर्ती बंगाल के भी थे। तगादा के दबाव में कई एजेंट भी क्षेत्र छोड़कर भूमिगत हो गए। अंतत: मई 2013 में शहर के माछमारा निवासी दिलीप कुमार साह ने सीजेएम के कोर्ट में वाद दायर कर दिया। परिवाद पत्र संख्या 571 सी/2013 में उन्होंने जांच की मांग की। इसी परिवाद के आधार पर किशनगंज पुलिस ने तब थाना कांड संख्या 198/13 दिनांक 02 जून में सारदा रियल्टी इंडिया लिमिटेड कोलकाता के सीएमडी सुदीप्त सेन, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर देवयानी मुखर्जी, शाखा प्रबंधक राजेश कुमार मिश्रा, सीनियर लीडर ओमकार मल्लिक, जेनरल मैनेजर गौतम चौधरी को प्राथमिक अभियुक्त बनाया।

2009-10 में शारदा बैंक की एक शाखा कलटैक्स चौक में खोली गई थी

सुनील ने बहन की शादी करने के लिए जमा किए 50 हजार रुपए

शहर के तेघरिया निवासी सुनील कुमार ने बताया कि वो एक मॉल में काम करता है। बेहद कम तनख्वाह पर परिवार का किसी तरह गुजारा कर उसने 50 हजार रुपए बहन की शादी के लिए जमा किए थे। लेकिन उसकी खून पसीने की कमाई डूब गई। सुनील के अनुसार उसके जैसे कई अन्य लोग भी रातों रात इस भीषण ठगी के शिकार हुए। उन्होंने बताया कि मेरी तो आस ही टूट गई कि मेरी बहन की शादी कैसे होगी। कई सालों बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया है। भगवान करें हमारे पेसे वापस आ जाए।

केस-1

2013 में कंपनी के दफ्तर में ताला लगाकर अधिकारी कर्मचारी रातों रात हो गए थे फरार

मंजर आलम ने किराना दुकान चलाकर 25 हजार जमा किए थे

खगड़ा निवासी से किराना दुकान चलाकर अपना परिवार चलाने वाले मंजर आलम ने यह सोचकर शारदा में निवेश किया कि महज पंद्रह माह में रुपए दो गुणे हो जाएंगे। एक बैंक में दैनिक एक सौ रुपए जमा करनेवाले मंजर ने उसी बैंक से 25 हजार रुपए निकालकर शारदा में निवेश कर दिया। सोचा महज पंद्रह महीने की बात है उसके बाद दुकान को रिमॉडल कर उसमें माल अधिक रखेंगे ताकि मुनाफा अधिक हो। पर ऐसा हो नहीं सका। उससे पहले की कंपनी भाग गई।

केस-2

मामला इंटर स्टेट होने सेे सीबीआई को सौंपा गया


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