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12 घंटे सरकारी डॉक्टर रहे हड़ताल पर,बंद रही ओपीडी सेवा, बिना इलाज के लौटे मरीज

एक वर्ष पहले
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नालंदा में डॉक्टर की गोली मारकर हत्या करने की घटना के बाद डॉक्टरों का विरोध शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। चिकित्सक की हत्या के विरोध में शनिवार को जिले के सभी डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। डॉक्टर सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक हड़ताल पर रहे। डा. के हड़ताल पर रहने के कारण अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा ठप रहा, वहीं इमरजेंसी में इलाज होता रहा। दूसरे दिन हड़ताल से अस्पताल की स्थिति चरमरा गई। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डा.श्याम सुंदर प्रसाद सिंह ने बताया कि चिकित्सकों की सुरक्षा एवं मृतक को न्याय दिलाने सहित अन्य मांगों को ले डॉक्टरों ने हड़ताल का निर्णय लिया है। इसमें निजी क्लीनिक भी शामिल है। इस दौरान सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही उपलब्ध है। इस दौरान सदर अस्पताल में दूर-दराज से आए मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा ठप है। केवल इमरजेंसी में ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है। आईएमए ने ऐलान करते हुए कहा कि डॉक्टर 12 घंटे तक हड़ताल पर रहेंगे। बता दें कि दो दिन पहले नालंदा में डॉक्टर प्रियरंजन प्रियदर्शी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। जिसके विरोध में यह हड़ताल की जा रही है। इस हड़ताल में ओपीडी की सारी सेवाएं ठप रही। ओपीडी में डॉक्टर ने काम नहीं किया हालांकि बीच सरकारी और निजी क्लिनिकों में इमरजेंसी सेवाएं चालू रही।

बंद के दौरान ये रहे मौजूद

12 घंटे के बंद के दौरान निजी क्लिनिक और अस्पतालों में ताला लटका रहा। ओपीडी में कुर्सियां खाली रही। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डा. श्यामसुंदर प्रसाद सिंह, डा. रामानुज प्रसाद सिंह, आईएमए के सचिव डा. आलोक कुमार,डा. गौतम कुमार,डा. अनंत शंकर, डा. राकेश कुमार,डा. राजकिशोर सिंह, डा. डीपी यादव, डा. अशोक कुमार सिंह आदि बंद के दौरान सक्रिय रहे।

हत्यारों की गिरफ्तारी व उचित मुआवजे की मांग

इलाज को आए सैकड़ों मरीज ओपीडी और रजिस्ट्रेशन काउंटर को खाली देखकर बैरंग लौट गए। चिकित्सक की हत्या के विरोध में आईएमए के चिकित्सकों ने सदर अस्पताल की मेडिकल व्यवस्था ठप कर दी। हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग व मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा की मांग को लेकर चिकित्सकों ने पूरे अस्पताल परिसर में घुमकर सभी विभाग के ओपीडी को बंद करा दिया। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डा. श्याम सुंदर प्रसाद सिंह ने कहा कि कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। भासा एवं आईएमए के आह्वान पर जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं आए। डाॅक्टर के हड़ताल के कारण रजिस्ट्रेशन काउंटर एवं दवा काउंटर बन्द रहा। अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ चुका है कि वह किसी की भी हत्या कर देते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती और चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर दी जाती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

हड़ताल के दौरान सरकारी और निजी अस्पतालों में एमरजेंसी सेवा चालू रही

सदर अस्पताल स्थित बंद पडा रजिस्ट्रेशन काउंटर

सदर अस्पताल में हड़ताल में डाक्टर व शोकसभा में शामिल चिकित्सक
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