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कोरोना के कारण देसी रंगों की बढ़ी मांग, बाजार में पिचकारी ~10-200 तक उपलब्ध

एक वर्ष पहले
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इस बार चीन से नहीं आया माल,काराेबारियों ने कहा- 25 प्रतिशत चाइनीज आइटम बाजार में है

रंगों की त्योहार होली कल है। रंग, अबीर के साथ पिचकारी और मुखौटों से सजे बाजारों पर होली के रंग चढ़ गए हैं। वहीं लोगों में कोरोना वायरस का भी खौफ दिखाई पड़ रहा है। रंग, अबीर-गुलाल चाइनीज न हो, इसलिए खरीदारी से बच
रहे हैं।

मुख्य बाजार में रंग, अबीर और पिचकारियों की भरमार है, लेकिन खरीदारों में कमी को देखकर दुकानदार मायूस हैं। विभिन्न तरह से रंगों की जगह लोगों में भारतीय हर्बल गुलाल की मांग देखी जा रही है। बाजार में मोटू पतलू और एयर गन की पिचकारियां बच्चों को खूब लुभा रही हैं। बैलून वाली पिचकारियां भी बाजार में हैं। बाजार में फिल्मी हस्तियों के मुखौटों के साथ क्रिकेट और अन्य खिलाड़ियों के मुखौटे सजे हुए हैं। इसके अलावा रंग और अबीर गुलाल सजा हुआ है। रंगों के साथ हर्बल रंग भी बाजार में उपलब्ध हैं। मिकी-डोनाल्ड जैसे कई कार्टून इन पिचकारियों पर छपे हुए हैं। लेकिन कोरोना वायरस की वजह से चीन आयात सामान की सप्लाई बाधित होने के कारण होली पर देशी पिचकारी और रंगों की मांग बढ़ गई है। शहर के नया बाजार में होली के आइटम बेचने वाले कारोबारी ने बताया कि आम तौर पर होली से दो महीने पहले से ही चाइनीज आइटम के आर्डर दिए जाते थे। इसके बाद माल की सप्लाई शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार कोरोना वायरस का असर बाजार पर पड़ा है। एक तो चीन से माल नहीं आया और दूसरा जो बचा हुआ स्टॉक है, वहीं ब्रिकी के लिए दुकान में सजाया गया है। कराेबारियों ने कहा कि 25 प्रतिशत चाइनीज आइटम बाजार में है।

हर्बल एवं अररोट गुलाल की मांग

पूरे शहर में हर नुक्कड़ों पर रंग गुलाल एवं पिचकारियांें की दुकानें सजी है। आर्टिफिशल बाल, विभिन्न प्रकार के मुखौटे की मांग है। बच्चों को मोटू पतलू सिनचैन एवं एयरगन वाली की खिलौने वाली पिचकारियां खूब भा रही है। परंपरागत गुलाल की जगह हर्बल एवं अररोट निर्मित गुलाल की मांग बढ़ी है।

बाजार में उमड़ी भीड़, लगा जाम

रविवार को बाजार में ग्राहकों की भीड़ सुबह से ही उमड़ती रही। लोगों ने होली सामग्रियों की जमकर खरीदारी की। सड़कों पर एकाएक दबाव बढ़ने से शहर में घंटों जाम लगा रहा। दिन भर दुकानदार एवं ग्राहक जाम से परेशान रहे। किऊल-गया सेक्शन की ट्रेनें प्रभावित होने के कारण भी सड़कों पर लोगों का दबाव काफी बढ़ गया है।

ग्राहकों की संख्या कम

देशी पिचकारी, हर्बल रंगों, गुब्बारों और पानी के साथ रंग बरसाने वाले विभिन्न प्रकार के खिलौनों की मांग है। बाजार में 10 रुपये से लेकर 200 तक की पिचकारियां उपलब्ध है। पिछले वर्ष के मुकाबले बाजार में ग्राहकों की संख्या कम देखी जा रही है।

होली पर्व को ले पिचकारी की खरीदारी करते बच्चे व अभिभावक व पिचकारी से सजा दुकान।
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