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किसानों को दी गई जैविक खेती से संबंधित जानकारियां

एक वर्ष पहले
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जिला कृषि पदाधिकारी के निर्देश पर रविवार को प्रखंड के ई किसान भवन में कृषि समन्वयक चन्द्रभूषण कुमार की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2019-20 में जैविक कोरिडोर योजना के अंगीकरण तथा प्रमाणीकरण योजना अंतर्गत प्रखंड में गठित किसान समूहों का प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित किसान समूहों के सदस्यों को जैविक कोरिडोर योजना से सबंधित जानकारी दी गई। कृषि समन्यवक चन्द्रभूषण कुमार ने उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रसायनिक खाद, पेस्टसाइज से उगाए गए अनाज और सब्जियां सेहत के लिए काफी नुकशानदेह होते हैं जो गम्भीर बीमारियों को जन्म देती है। उन्होंने बताया कि जैविक तरीके से उगाई गईं सब्जियों के लिए एक अलग मार्केटिंग की व्यवस्था है जिसकी ज्यादा कीमत भी मिलती है। सरकार चार हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान देती है और वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए भी 20 हजार रुपये का अनुदान देती है। जैविक खेती अपनाने के पश्चात भूमि की उर्वरता, अनाज की गुणवत्ता, रासायनिक खादों के उपयोग न करने से काफी अच्छी होती है।

बाजार में जैविक उत्पादों की मांग निरंतर बढ़ रही है। किसानों को यह भी बताया गया कि समय-समय पर कृषि विभाग की तरफ से प्रशिक्षण व गोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। जिसमें निरंतर जैविक खेती के विषय में वैज्ञानिकों के सुझाव मिलते हैं। कृषि समन्यवक रामप्रवेश सिंह ने कहा कि खेती में रासायनिक उर्वरक तथा कीटनाशक के उपयोग को कम करने के लिए प्राकृतिक खाद तथा कीटनाशकों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है । इसके लिए राज्य सरकार ने रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर किसानों की निर्भरता कम करने के उद्देश्य से वर्मी कम्पोस्ट पिट का निर्माण , गोबर / बायो गैस, हरी खाद योजना, वर्मी कम्पोष्ट उत्पादन इकाई एवं जैव उर्वरक उत्पादन इकाई के निर्माण पर भी कार्य किया जा रहा है ।इस मौके पर किसान सलाहकार संजय दास,बीरेन्द्र कुमार,उचित कुमार सहित सैकड़ों किसान मौजूद थे।

जैविक खेती की जानकारी देते कृषि समन्वयक।
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