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मिट्टी में समाने वाले को गुरुर नहीं करनी चाहिए : रामानुज

एक वर्ष पहले
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अच्छी बातें किताबों और दीवारों पर लिखी होती है। बेहतरीन इंसान की शालीनता, अनुशासन और बेहतरीन जुबान सदा सुखदायी होती है। संत निरंकारी मिशन के आयोजित वार्षिकोत्सव पर यें बाते गुरूगद्दी पर विराजमान महात्मा रामानुज सिंह ने कही। नया बाजार स्थित बाजार समिति कैम्पस स्थित संत निरंकारी मध्य विद्यालय परिसर में शुक्रवार को संत निरंकारी मिशन के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का अायोजन किया गया था।

अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि मिट्टी से,मिट्टी पर और फिर मिट्टी में समाने वाले इंसान को कभी गुरुर नहीं करनी चाहिए। इससे पूर्व विद्यालय के प्राचार्य अनय कुमार ने संत महात्मा निरंकारी मिशन के महात्मा रामानुज को गद्दी पर विराजामन कराया। प्राचार्य सह मिशन मंडल के सदस्य अनय कुमार ने कहा कि संत निरंकारी मिशन कोई प्रचलित धर्म या सम्प्रदाय नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक विचारधारा है। भारत में इसकी नींव 1948 में रखी गई थी वर्तमान में बाबा हरदेव सिंह की पुत्री सतगुरु राजमाता सुदीक्षा जी संत निरंकारी मिशन संगठन की अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि कि भारत में संगठन के तीन हजार केंद्र और विश्व के 27 देशों में 200 केंद्रों पर एक करोड़ से अधिक अनुयायी हैं। मुख्य संदेश ईश्वर को अपने से दूर समझना ही सांसारिक कष्ट का मूल कारण है। ईश्वर एक हैं। एक को जानो, एक को मानो और एक होकर मानवता का परिचय दो। तभी मन को शांति,तन को सुखी और संसार को समृद्धि मिलेगी। मौके पर सैकड़ों अनुयायियों के बीच लंगर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संत निरंकारी सेवा दल के मनीष जी,मंजू बहन, विमला बहन, मानो बहन, त्रिलोकी साव, सुबोध जी, सुचित कुमार, ओमप्रकाश गणेश, सीता राम,अर्चना,रेणु,कंचन,पिंकी,नीखेधी पासवान, सुबेलाल महेश पप्पू, कुंदन, विनोद, संजय, संदीप,जयराम पंडित व पिंटू प्रमुख मुखी महात्मा के रूप में
शामिल हुए।

संत निरंकारी के वार्षिकोत्सव पर शामिल लोग।
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