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अंदर की नेकी की सलाहियत बढ़ाने का महीना है रमजान, गुनाहों और खुदा की नाफरमानी से बचने का माह

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:40 AM IST

Lakhisarai News - सूर्यगढ़ा| माह-ए-रमजात के दूसरे जुमे शुक्रवार को प्रखंड के मौलानगर, हल्दी, पुरानीबाजार, कटेहर, चकमसकन, अलीनगर,...

Surajgarha News - the month of raising the goodness of inner goodness is the month of ramzan the crime and the avoidance of goddess
सूर्यगढ़ा| माह-ए-रमजात के दूसरे जुमे शुक्रवार को प्रखंड के मौलानगर, हल्दी, पुरानीबाजार, कटेहर, चकमसकन, अलीनगर, मेदनीचौकी सहित अन्य मस्जिदों में रमजान माह के दूसरे जुमे की नमाज अदा की गयी। उसके बाद जामा मस्जिद के इमाम मो. मजहर समेत अन्य मस्जिदों के इमामों ने सभी को इस पवित्र रमजान की जरूरत की जानकारी दी। दूसरे जुमे के नमाज के दौरान प्रखंड के विभिन्न मस्जिदों में काफी भीड़ रही। महिलाओं व बच्चियों ने घर पर नमाज अदा की। इमाम ने बताया कि इस्लाम धर्म में रमजान का महीना सबसे पवित्र माना जाता है। पीएचसी के डॉ. रहमतुल्लाह आलम ने बताया कि माह-ए-रमजान का महीना इस्लामिक बुजुर्गों और फसीलत का है। इसमें आदमी के अंदर की नेकी व सलाहियत बढ़ती है। हर मुसलमान के लिए रोजा फर्ज है। गुनाहों और खुदा की नाफरमानी से बचने का महीना है। पैदा करने वाले रब की सही इबादत की जाती है। इसे गमखारी का महीना भी कहा जाता है। गरीबों और बेकसूरों से हमदर्दी करने की सीख मिलती है। माह-ए-रमजान में गरीबों की मदद करनी चाहिए। नवी फकीरों और जरूरतमंदों की मदद करते थे। रमजान में गरीबों को दान देना अल्ला ताला का हुक्म है। वहीं पहले जुमे की सुबह खरीदारी को लेकर बाजारों में काफी भीड़ देखी गयी। काफी संख्या में लोग फल व अन्य सामग्री की खरीदारी करते दिखे।

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