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रंग-गुलाल के साथ महिला एवं पुरुषों की निकली टोली

एक वर्ष पहले
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परंपरागत गीत और रंग गुलाल के बीच होली का त्योहार संपन्न हुआ। श्हर से लेकर गांव तक लोग होली के रंग मंे डूबे रहे। गांव में कीचड़ और कुर्ता फाड़ होली हुई। गांवों में एक ओर महिला दूसरी ओर पुरूष की टोलियाें द्वारा रंग की बौछार होती रही। युवा एवं महिलाओं की अलग अलग टोली रंगों के साथ निकली। एक दूसरे को रंगों से सराबोर किया। फिर दोपहर बाद खूब गुलाल उड़े। युवा कुर्ता पायजामा एवं महिलाएं साड़ी एवं सलवार सूट में सजी थी। अगल अलग टोली बनाकर घरों से निकले। एक दृूसरे को मुख पर गुलाल मला।

छोटो ने अपने बड़ों के पांव पर गुलाल रख अाशीर्वाद लिया। वहीं युवा वर्ग एक दूसरे से गले मिले और होली की शुभकामना दी। होली पर लोग अपने अलग रूप में दिखे। अपने अंदाज में होली मनाया। कोई मुखैटा तो कोई कृत्रिम बाल लगा कर होली सिलिब्रेट कर रहे थे। बच्चों ने भी अपने अंदाज में होली मनाया। सुबह बाल्टी में रंग लेकर छत के ऊपर से हर किसी आने जाने वालों को उड़लते रहे। छोटे छोटे बच्चों ने पिचकारी में रंग भर रंगों की बौछार की।

ग्रामीण क्षेत्रों में निकली महिलाअों की टोली


ग्रामीण क्षेत्रों में होली आज भी अगल अंदाज में मनाया जाता है। वहां महिला एवं पुरूषांे की अलग अलग टोली निकलती है। पुरूषों टोली जहां ढ़ोल- झाल अौर होली की गीत के साथ निकले वहीं महिलाओ की टोली भी रंग के साथ निकल कर घर घर तक पहंुची।

घरों पर आजे-जाने का चलता रहा सिलसिला| होली गीले सिकवे भूलाने का त्योहर है। यह परंपरा यहां देखने को मिली। रंग के बाद लोग नये वस्त्र पहनकर अपने अपने घरों से नकले एक दूसरे को गुलाल लगाया। बड़ों से आशीर्वाद लिया तो किसी से गले मिलकर होली की शुभकमना दी।


होली पर्व पर एक दूसरे को पिचकारी से रंग डालती महिला।

होली पर्व पर एक दूसरे को गुलाल लगाते लोग।
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