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डीटीओ कार्यालय का कारनामा : एक ही नंबर की एंबेसडर कार मधेपुरा में, हीरो बाइक पूर्णिया में दौड़ रही

एक वर्ष पहले
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{2020 तक कार का है इंश्योरेंस, इसके साथ ही टैक्स की राशि भी जमा

जिला परिवहन कार्यालय में सब कुछ ठीक नहीं है। व्यवस्था की सुधार के तमाम प्रक्रियाओं और विभागीय दावे के बावजूद यहां के कारनामे निराले होते हैं। कभी एंबेसडर कार के रजिस्ट्रेशन नंबर से दूसरे जिले के लोगों को बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर जारी कर दिया जाता है, तो कभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी पीछे आने वाले अावेदक का ड्राइविंग लाइसेंस बन जाता है पर जो पहले अप्लाई करता है, वह कार्यालय का चक्कर काटते रहता है। जनवरी में डीएम नवदीप शुक्ला ने जब डीटीओ कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था, तो उसी समय इस बात की पुष्टि हो गई थी कि जिला परिवहन कार्यालय में सेटिंग के दम पर सबकुछ होता है, अन्यथा पुराने मामले पेंडिंग और नए मामलों को निष्पादन नहीं हो रहा होता। पूर्व केंद्रीय मंत्री डीपी यादव के समधी अरविंद प्रसाद यादव भी इन दिनों परिवहन विभाग के कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। दरअसल बिहारीगंज के फतेहपुर निवासी इनके पिता उपेंद्र नारायण मंडल के नाम से बीआर- 43-2255 नंबर की एक एंबेसडर कार मधेपुरा डीटीओ कार्यालय से रजिस्टर्ड है। 16 जनवरी को इनके पुत्र अरविंद यादव कार का प्रदूषण चेक कराने गए, तो इन्हें पता चला कि उक्त रजिस्ट्रेशन नंबर पूर्णिया जिले के बेलवा निवासी प्रदीप कुमार यादव के पुत्र केशव कुमार के नाम से हीरो बाइक रजिस्टर्ड है।

अरविंद यादव ने जो कागजाती साक्ष्य उपलब्ध कराया, उसके अनुसार उनके पिता उपेंद्र नारायण मंडल की इस एंबेसडर कार का 18 दिसंबर 2020 तक इंश्योरेंस है। साथ ही 30 सितंबर 2020 तक का इनका टैक्स भी जमा है। इस गड़बड़ी को ठीक कराने के लिए उन्होंने 16 जनवरी को ही डीटीओ कार्यालय में आवेदन दिया, लेकिन अबतक इस गड़बड़ी को ठीक नहीं किया गया। जबकि ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों भी आया था, जब एक जनप्रतिनिधि की स्कॉर्पियो का नंबर भी किसी बाइक के नंबर में रजिस्टर्ड कर दिया गया। हालांकि काफी दिनों तक दौड़ लगाने के बाद उनका काम कर दिया गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सबकुछ ऑनलाइन है तो डीटीओ कार्यालय में इस तरह की गड़बड़ी कैसे और किस मंशा से की जाती है।

मामला संज्ञान में नहीं, किसी प्रकार की गड़बड़ी
हुई होगी तो उसे ठीक कराया जाएगा


एंबेसडर कार के पूर्व से चल रहे रजिस्ट्रेशन नंबर से हाल फिलहाल में किसी बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित कर दिया गया है, इसकी जानकारी नहीं है। संभव है कि एनआईसी से अपलोड करने में लिपिकीय भूल हुई हो। यदि ऐसा है तो जल्द ही मामले को संज्ञान में लेकर निष्पादन किया जाएगा। अन्य किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई होगी, तो उसको भी ठीक कराया जाएगा।
पुरुषोत्तम कुमार, डीटीओ मधेपुरा

कलेक्ट्रेट।

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने को भटकते हैं आवेदक

भालेंद्र कुमार ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 4 अक्टूबर 2019 को अप्लाई किया था। जिसका रिसिप्ट तिथि 8 अक्टूबर थी। आवेदक भालेंद्र की सारी कागजी प्रक्रिया पूरा हो चुकी है। भालेंद्र कहते हैं कि उनका ट्रायल भी हो चुका है। अब लाइसेंस बनना है। लेकिन साहब ने इसको प्रिंट कर नहीं भेजा है। आज-कल किया जा रहा है। कार्यालय जाने पर कभी कहा जाता है कि इंटरनेट काम नहीं कर रहा है तो कभी कहा जाता है कि अधिकारी नहीं हैं। डीटीओ पुरुषोत्तम कुमार काे मधेपुरा के साथ-साथ खगड़िया का भी प्रभार है। पिछले कुछ वर्षों से यही हो रहा है। ऐसे कई मामले डीटीओ कार्यालय से जुड़े आए दिन आते रहते हैं।

अावेदक भालेंद्र को मिली रसीद।

{दूसरे के नाम पर रजिस्टर्ड हो जाने के कारण पिता की कार का प्रदूषण जांच नहीं करा पाए अरविंद यादव


अाैचक निरीक्षण में जिलाधिकारी को मिली थी गड़बड़ी

8 जनवरी को डीएम नवदीप शुक्ला ने जिला परिवहन कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के क्रम में वाहनों के निबंधन, ड्राइविंग लाइसेंस एवं अन्य कार्यों की जांच की गई। जांच के दौरान निबंधन एवं ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत करने की तिथि में विलंब पाया गया। इसके बाद अन्य पदाधिकारियों को भी कागजातों की जांच लगाया गया। इसके बाद वैसे सभी वाहनों के निबंधन एवं ड्राइविंग लाइसेंस की गणना कराई गई, जो विलंब से निर्गत किए गए अथवा किए जा रहे हैं। प्रथमदृष्टया पाई गई गड़बड़ी को देखते हुए डीएम ने तत्काल डीटीओ और एमवीआई को शो-कॉज पूछ दिया था। इस मामले में तत्कालीन डीटीओ के खिलाफ डीएम की अनुशंसा पर विभागीय कार्रवाई भी होने की बात कही जा रही है।

लापरवाही के कारण गड़बड़ियों को ठीक कराने के लिए चक्कर काटते हैं वाहन मालिक
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