272 उप स्वास्थ्य केंद्र में से 75% में बंद रहता है ताला, 700 की जगह 325 एएनएम ही तैनात

Madhepura News - जिले में 272 उप स्वास्थ्य केंद्र है। इसमें लगभग 75% केंद्रों में आज भी ताले लटके हैं। इन उपस्वास्थ्य केंद्रों में...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:51 AM IST
Murliganj News - out of 272 sub health centers 75 remains locked only 325 anms are deployed instead of 700
जिले में 272 उप स्वास्थ्य केंद्र है। इसमें लगभग 75% केंद्रों में आज भी ताले लटके हैं। इन उपस्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की देखभाल और मामूली इलाज का जिम्मा खासकर एएनएम और जीएनएम पर है।जीएनएम व एएनएम के 700 पद रिक्त हैं। लेकिन पूरे जिले में अभी भी 325 एएनएम ही तैनात हैं। इसमें भी अधिकतर एएनएम की हाल ही में नियुक्ति हुई है। इन केंद्रों के बारे में इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह 55 फीसदी एएनएम और जीएनएम सदर अस्पताल और पीएचसी में सेवा दे रही हैं।

इन स्वास्थ्य उपकेंद्रों के बारे में स्वास्थ्य विभाग को पता ही नहीं है कि उसके कितने केंद्रों में ताला लटका है या फिर अतिक्रमण का शिकार हैं। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जिले का शायद ही कोई स्वास्थ्य केंद्र बेहतर ठंग से काम नहीं कर रहा है। इतना ही नहीं इन केंद्राें के पोषक क्षेत्र के लोगों की पीड़ा है कि केंद्र तो बना दिया गया है, लेकिन इलाज कब होगा। इन केंद्रों पर नियमित इलाज आज भी ग्रामीणों के आंखों में महज एक सपना बन कर रह गया है। यही कारण है कि आज भी गरीब व जरूरतमंद लोग आज भी शहर या निजी क्लीनिक में अपना इलाज करवाने काे मजबूर हैं। अधिकारी पहले से आल इज वेल की बात कह कर विभाग की कमियों पर पर्दा डाल रहे हैं।

उपस्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति के बारे में विभागीय अधिकारी बने हैं अनजान

मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत गंगापुर स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र में बांधे गए मवेशी।

19 आयुष और 10 दंत चिकित्सक भी अपनी सेवा दे रहे हैं

सदर अस्पताल में 52 के बदले मात्र 17 डॉक्टर पदस्थापित, छह के जगह दो महिला चिकित्सक

विभाग का निर्देश है कि सप्ताह में एक दिन कम से कम एमबीबीएस डॉक्टर इन उपस्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर महिला व बच्चों की स्वास्थ्य जांच करेंगे। लेकिन जब सदर अस्पताल में 52 रिक्त पद के बदले मात्र 17 डॉक्टर पदस्थापित हैं। पीएचसी व अन्य केंद्राें में बैठने की बात कहना ही बेमानी होगी। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के नेता कहते हैं कि सरकार एक तो ठेका पर लोगों को रखती है, उस पर भी इतनी कम संख्या है कि काम करने वाले बोझ तले ही दबे रह जाते हैं। इतना ही नहीं सदर अस्पताल में जहां कम से कम 6 महिला रोग विशेषज्ञ होना चाहिए। वहां मात्र 2 महिला चिकित्सक हैं। हड्‌डी रोग विशेषज्ञ समेत कई कई अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। सदर अस्पताल में एक्स-रे मशीन तो है लेकिन महीनों से अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

आयुष व दंत चिकित्सक रख रहे हैं स्वास्थ्य विभाग की लाज

डॉक्टरों की कमी झेल रहे स्वास्थ्य विभाग की लाज जिले में कार्यरत 19 आयुष चिकित्सक, 10 दंत चिकित्सक और आरबीएसके के 23 चिकित्सक किसी तरह स्वास्थ्य विभाग की लाज रख रहे हैं। अब ये आयुष चिकित्सक नहीं हो तो विभाग का पूरा सिस्टम ही फेल हो जाएगा।

जल्द ही स्थिति में होगा सुधार


विभाग का दावा सप्ताह में एक या दो बार जाती हैं एएनएम

उपस्वास्थ्य केंद्र के बारे में स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पहले जिले में एनएनएम की संख्या काफी कम थी। लेकिन अब कुछ संख्या बढ़ी है। बावजूद रिक्त पद के अपेक्षा आधा है। विभाग के अधिकारी दबे स्वर में यह भी बताते हैं कि एएनएम की कमी के कारण सदर अस्पताल व पीएचसी को चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में एपीएचसी व उपस्वास्थ्य केंद्र की बात करना बेकार है। विभाग एएनएम की बढ़ी संख्या के बावजूद रोटेशन के आधार पर एपीएचसी एएनएम को भेज कर खानापूर्ति कर रही है। इसी के तहत जिले के कुछ ऐसे ही उपस्वास्थ्य केंद्र में एएनएम सप्ताह में एक या दो बार जाती हैं। दूसरी और ग्रामीणों का आरोप है कि उपस्वास्थ्य केंद्रों के नियमित रूप से नहीं खुलने के कारण जननी सुरक्षा योजना काफी प्रभावित होती है तथा इससे जुड़ी कई जरूरतमंद महिलाएं इस योजना से वंचित रह रही हैं। जिसके कारण आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में कुपोषण की संख्या ज्यादा है।

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