श्रावणी मेला को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरीं

Madhubani News - सावन को लेकर मदनेश्वर, चन्देश्वर व मुक्तेश्वर स्थान सज धज कर तैयार भास्कर न्यूज|अंधराठाढी प्रखंड के मदनेश्वर...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:45 AM IST
Phulpras News - administrative preparations to complete the shravani mela
सावन को लेकर मदनेश्वर, चन्देश्वर व मुक्तेश्वर स्थान सज धज कर तैयार

भास्कर न्यूज|अंधराठाढी

प्रखंड के मदनेश्वर स्थान, मुक्तेश्वर स्थान एवं चन्देश्वर स्थान महादेव स्थान में पूजा एवं मेला को लेकर स्थानीय व प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। प्रखंड विकास पदाधिकारी राजेश्वर राम, अंचल अधिकारी विष्णुदेव सिंह व थानाध्यक्ष अमृत लाल वर्मन के नेतृत्व में एक शांति समिति की बैठक हुई। मेला समिति द्वारा की गई तैयारियों का जायजा लिया। सावन में मदनेश्वर स्थान में यहां भव्य मेला का आयोजन होता है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए यहां आते हैं। मालूम हो कि मदनेश्वर स्थान में पालवंशीय राजा मदन पाल द्वारा स्थापित प्राचीन शिव लिंग है। मदनेश्वर स्थान की भौगोलिक बनावट अद्भुत है। अंधराठाढी ,बाबूबरही एवं फुलपरास की सीमा पर अवस्थित है। तीनों प्रखंड के सैकडों गांव के शिवभक्तों के अलावे खुटौना, लौकहा, लदनियां, झंझारपुर समेत नेपाल के भी श्रद्धालु यहां पहुंचते है। यहां चाक-चौबंद प्रशासनिक व्यवस्था रहती है। हरडी चन्देश्वर नाथ महादेव एक ऐतिहासिक धरोहरों में एक है। शिवगण चंड भैरव ने अपने हाथों से यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। आकार और आकृति में यह शिवलिंग अन्य मंदिरों से भिन्न है। स्थानीय श्रद्धालुओं के मुताबिक शिव भैरव कृपा व क्रोध का फलाफल आज भी यहां मिलता है। प्रो.डाॅ. महेश झा लिखित चन्देश्वर सुप्रभात स्तोत्रम् पुस्तक में काफी वर्णन है। इन्होंने लिखा है शिव से झगड़ा कर एक बार चंड भैरव यहां आकर छिप गए थे। तब इस जगह का नाम हरडीह था। इसका अपभ्रंशित शब्द हरड़ी है। महाकवि विद्यापति के दादा चंदेश्वर ठाकुर ने पहली बार यहां शिव मंदिर बनवाया था। मौजूदा मंदिर महाराज दरभंगा की देन है। जबकि मुक्तेश्वर स्थान में अंकुरित शिवलिंग माना जाता है। अंकुरण काल अब तक अज्ञात है। 600 वर्ष पूर्व से प्रचलित मिथिला में पंजी प्रथा मुक्तेश्वर स्थान में घटित एक घटना की देन है। घटना कर्णाट वंशीय राजा हरिसिंह देव के समय में यह घटना घटी थी। कमला, बलान, सोनी नदियो के संगम स्थल पीपरा घाट से जल बोझ कर मुक्तेश्वर नाथ पर चढ़ाया जाता है। अब यह संगम स्थल दो किमी पश्चिम पिपराघाट में मिलता है।

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