आंगनबाड़ी सेविकाओं और आशा ने गृह भ्रमण कर गर्भवतियों को किया जागरूक
जिले में पोषण पखवाड़ा अभियान के तहत सभी प्रखंडों के आंगनबाड़ी सेविकाओं व आशाओं ने गृह भ्रमण किया। इसके तहत जिले के राजनगर, रहिका, खजौली, जयनगर, झंझारपुर, फुलपरास, घोघरडीहा, मधवापुर सहित सभी प्रखंड के टोला-मुहल्ले का भ्रमण कर गर्भवती महिलाओं को एएनसी जांच, स्तनपान, पूरक आहार की जानकारी दी गई। गृह भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं ने गर्भवती महिलाओं को बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान चार प्रसव पूर्व जांच एवं टिटनेस का टीका सुरक्षित प्रसव के लिए जरूरी होता है। समय पर प्रसव पूर्व जांच नहीं होने एवं बेहतर पोषण के आभाव के कारण गर्भवती महिलाओं में खून की कमी आ जाती है। प्रेग्नेंसी के दौरान ध्यान न देने पर महिला कमजोर हो जाती हैं। जिसके कारण पैदा होने वाला बच्चा कमजोर होता है, जो कि कुपोषण के शिकार हो जाते है। ऐसी स्थिति न पैदा हो इसके लिए गर्भवती महिला को बेहतर देखभाल की जानकारी दी गयी तथा पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी गई। भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं ने गर्भवती महिलाओं को बताया कि आखिरी महीने में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इस दौरान आहार में प्रोटीन विटामिन कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ वसा की भी मात्रा होना जरूरी होता है। इसके लिए समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को साप्ताहिक पुष्टाहार भी वितरित किया जाता है। गर्भवती महिलाओं को यह भी बताया गया कि जन्म के शुरूआती 1 घंटे में स्तनपान की शुरुआत एवं अगले 6 माह तक केवल स्तनपान, बच्चे को गर्म रखने एवं वजन में वृद्धि के लिए कंगारू मदर केयर, गर्भ नाल को सूखा रखें ऊपर से कुछ भी ना लागएं, निमोनिया एवं डायरिया होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह आदि की जानकारी दी।
आईसीडीएस की डीपीओ डाॅ. रश्मि वर्मा ने बताया कि पोषण पखवाड़ा में आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं आशाओं के नियमित गृह भ्रमण पर ज़ोर दिया जा रहा है।
गृह भ्रमण करती आशा व सेविका।