प्रतिदिन सैकड़ों टन कचरा फेंकने और गंदा पानी जाने से मैली हो गई कमला

Madhubani News - कमला अब पूर्व की भांति पवित्र व शुद्ध नहीं रही। लोग कमला की पानी पीने एवं अनुष्ठान करने से परहेज कर रहे हैं। लोगों...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:50 AM IST
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कमला अब पूर्व की भांति पवित्र व शुद्ध नहीं रही। लोग कमला की पानी पीने एवं अनुष्ठान करने से परहेज कर रहे हैं। लोगों की क्रिया का ही ये प्रतिक्रिया है। वही दूसरी नदी को लेकर सरकार की गाइड लाइन को प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा नजर अंदाज करने के कारण दिनों दिन कमला प्रदूषित होती गई। जिसके कारण पूरे मिथिलांचल परोक्ष व अपरोक्ष रूप से प्रभावित हैं। शहर एवं आस पास क्षेत्र के गंदे एवं जहरीले पानी को कमला में ही प्रवाहित की जाती है। इसके अलावा प्रतिदिन सैकड़ो टन कचड़ा कमला में फेंके जाते हैं। लोग अपनी सुख सुविधाओं के सामने कमला की पवित्रता एवं रख रखाव को जाने अनजाने में पीछे छोड़ दिया है। जिसका परिणाम आज धीरे-धीरे विकराल होती जा रही है। लोग कमला में आचमन करने से भी कतराते हैं।

मास्टर प्लान नही, गंदे पानी कमला में होती है प्रवाह

शहर के कई इलाकों के गंदे पानी कमला रोड से होते हुए इतिहासिक काली मंदिर के बगल से कमला में गिरती है। शहर के अन्य क्षेत्रों के गंदे पानी को भी वार्ड नंबर छह से होकर कमला नदी में गिराई जाएगी। नगर पंचायत प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है। प्लस्टिक कैरी बैग पर कानूनी पाबंदी जरूर लगी है। लेकिन आज भी बॉर्डर क्षेत्र के लोग चोरी छिपे इसका उपयोग कर रहे हैं। सभी छोटे-बड़े नालों में पॉलीथिन एवं प्लास्टिक बड़े पैमाने पर देखे जा रहे हैं। जो नालो के सहारे कमला में ही गिरती है। कमला तट पर सैकड़ो गांव अवस्थित हैं। लोग कूड़े करकट, कचड़ा एवं प्लास्टिक कमला में ही डालते हैं।

कमला नदी में कचरा।

पानी की गंदगी से 10 लाख लोग हो सकते हैं प्रभावित

नेपाल के हिमालय क्षेत्र से बहकर भारतीय क्षेत्र के जयनगर में प्रवेश करने वाली पवित्र कमला मिथिलांचल वासियों की जीवनदायनी है। करीब 10 लाख से अधिक लोग कमला से प्रभावित है। कमला हर साल अपने साथ उपजाऊ मिट्टी लेकर आती हैं। जिससे किसानों को अच्छी फसल होती है। लेकिन विगत कुछ दशकों से कमला नालों में तब्दील हो गई है। वही दूसरी ओर क्षेत्र के गंदे एवं जहरीले पानी एवं कूड़ा-कचरा कमला में फेंके जाने के कारण कमला दूषित हो गई है। प्रशासन एवं जनप्रतिनिधि इस गम्भीर समस्या के प्रति मौन है।

जल पीने व अनुष्ठान करने में परहेज

प्रशासन की उदासीनता के करण कमला तेजी से प्रदूषित होती जा रही है। लोग कमला की जल पीने एवं अनुष्ठान करने में परहेज कर रहे है। कही कही के कमला में कचरा इतनी है की लोगों को इस होकर गुजरना मुसीबत हो जाता है। खासकर महापर्व छठ में श्रद्धालुओं को काफी दिक्कत व परेशानियां का सामना करना पड़ता है। साफ-सफाई करने के बावजूद श्रद्धालुओं के पैर में शीश, प्लास्टिक, कांटी व अन्य चीजें चुभते रहती हैं। काली मंदिर के नजदीक गंदे पानी गिरने के अलावा कचरा फैली है।

मास्टर प्लान बनेगा

कार्यपालक अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि शहर के कचरा को डंपिंग करने के लिए एक जगह को चिह्नित किया जा रहा है। कमला में गंदे पानी का प्रवाह नही की जाए, इसको लेकर एक मास्टर प्लान बनाया जाएगा।

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