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युवा पीढ़ी बुजुर्गों का करे सम्मान, तभी संस्कृति का बचाव हो सकेगा
ईश्वरीय वृद्ध सेवाश्रम कैटोला के परिसर में हिंदी साहित्य समिति ने तीन सत्रों में परिचर्चा व कवि गोष्ठी का आयोजन राजेश पाण्डेय व रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी भरत प्रधान की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित किया गया। विषय प्रवेश करते हुए संयोजक सत्यम पंकज ने कहा कि वर्तमान समय में बुजुर्गों की सुरक्षा-संरक्षा सबसे ज्वलंत मुद्दा है। वृद्धों की दशा चिंतनीय है, उनकी सेवा विचारणीय है। सुनील कुमार यादव ने कहा कि वृद्धों के प्रति युवाओं के परम्परागत सम्मान में जो कमी आई है, उससे सम्पूर्ण समाज चिंतित है। डॉ. विनय विश्व बंधु ने कहा कि शास्त्र-पुराण में जो शिक्षा है, युवा पीढ़ी ग्रहण करें, तभी संस्कृति का बचाव हो सकेगा। बुजुर्गों का संरक्षण व सम्मान आवश्यक है। डॉ.गोपी रमण झा, प्रो.शुभ कुमार वर्णवाल, महंत स्वामी, दीपक सिंह, दयानंद झा, राजेश पाण्डेय, भरत प्रधान सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि माता-पिता की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं। दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। तीसरे सत्र में आज के बदले परिवेश में नारी की दिशा व दशा पर परिचर्चा के दौरान डॉ.कूल्धारी सिंह, ज्योति रमण झा बाबा, भोलानंद झा, विजय शंकर पासवान सहित अन्य ने कहा कि भारतीय समाज का नैतिक अवमूल्यन हो रहा है। जिस समाज व परिवार में महिला का सम्मान नहीं वह कभी विकास नहीं कर सकता।
वृद्ध आश्रम मंे आयोजित कवि सम्मेलन मंे शामिल बुजुर्ग।