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यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए दूसरों के चापाकल तो महिलाओं को स्थानीय लोगों के घरों का लेना पड़ता है सहारा, फिर भी हल नहीं

Madhubani News - मधेपुर बस स्टैंड में यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए निजी चापाकल का सहारा लेना पड़ता है। इतना ही नहीं यात्रियों को...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:01 AM IST
Phulpras News - in order to quench the thirst of the passengers others have to take care of the handpumps women have to take the local people39s houses sahara still does not solve
मधेपुर बस स्टैंड में यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए निजी चापाकल का सहारा लेना पड़ता है। इतना ही नहीं यात्रियों को पेशाब करने व शौच जाने के लिए भी निजी घरों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। पुरुष तो इधर उधर कहीं सड़क किनारे खुले में निपट लेते हैं। लेकिन महिला यात्रियों के लिए मुसीबत खड़ी हो जाती है। दिन हो या रात महिला यात्रियों को स्थानीय वाशिंदों के घर आंगन का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इस जटिल समस्या से अवगत रहते हुए भी इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने में अबतक विफल रहे हैं। एक दशक पहले तत्कालीन विधायक जगत नारायण सिंह के एच्छिक कोष से यात्री शेड के पीछे दो कमरे का शौचालय बनवाया गया था और बगल में चापाकल लगाए गए थे। लेकिन समय बदला सत्ता बदली और बदल गई यहां की भौगोलिक स्थिति। लगभग तीन साल पहले यात्री शेड के पीछे एक व्यक्ति द्वारा निजी भवन निर्माण कराया गया। जिनके द्वारा शौचालय व चापाकल की जमीन को रातों रात अतिक्रमित कर लिया गया।

मधेपुर बस स्टैंड स्थित अतिक्रमित सुलभ शौचालय व खराब चापाकल।

िवधायक ने मामले को गंभीरता से लिया

स्थानीय लोगों के कहने पर फुलपरास विधायक गुलजार देवी एवं उनके पति पूर्व विधायक देवनाथ यादव ने मामले को गंभीरता से लिया। विधायक ने जिलाधिकारी मधुबनी को पत्र लिखकर बस स्टैंड के शौचालय की अतिक्रमित जमीन को शीघ्र अतिक्रमणमुक्त कराने को कहा। उक्त जमीन का सीमांकन कराने के बाद अन्य विकास के कार्य कराए जाएंगे।

प्रतिदिन पांच बसें दरभंगा पटना व दिल्ली के लिए हैं

उल्लेखनीय है कि मधेपुर बस स्टैंड से प्रतिदिन लगभग पांच दर्जन बसें दरभंगा, पटना, दिल्ली सहित अन्य जगहों के लिए खुलती है। औसतन दो हजार यात्री प्रतिदिन यहां से बस यात्रा करते हैं। इतना ही नहीं बाजार, बैंक, अस्पताल सहित अन्य कार्यों से प्रतिदिन मधेपुर पहुंचने वाले हजारों लोगों के लिए कहीं भी सुलभ शौचालय और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है।

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