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सीपैप मशीन नहीं रहने के कारण नवजाों को किया जा रहा रेफर

एक वर्ष पहले
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रीता देवी के बच्चे को सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू से दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वह बिस्फी के खंगरैठा गांव की निवासी है। सीपैप मशीन एसएनसीयू में नहीं रहने के कारण बच्चा रेफर किया गया। इस बच्चे को सांस लेने में तकलीफ थी। वहीं, झंझारपुर के रैयाम गांव की शाहीदा खातून की बच्ची के फॉलोअप के लिए आई थी। उसे भी वापस लौटना पड़ा। मालूम हो कि एसएनसीयू में लगभग 100 से 125 नवजात शिशु इलाज के लिए भर्ती होते हैं। पर वार्मर की भी व्यवस्था संतोषजनक नहीं हैं। चार नया वार्मर जो तीन महीना पहले आया उसमें भी एक खराब है। इसकी मरम्मत नहीं कराई जा सकी है। यहां स्तनपान कक्ष और मदर्स रूम एक ही कमरे में हैं जिससे उसमें बेड से अधिक महिलाएं हो जाती हैं। नाइट गार्ड नहीं रहने के कारण ए ग्रेड नर्स को ही आक्सीजन का सिलिंडर खोलना व लगाना पड़ता है।

कमजोर व सांस में परेशानी वाले बच्चे होते हैं भर्ती | सदर अस्पताल स्थित स्पेशन न्यू बॉर्न केयर युनिट में कम वजन के और सांस में दिक्कत का सामना कर रहे बच्चे अधिक आते हैं। यहां जन्म से लेकर एक साल तक के बच्चों का इलाज होता है। पिछले दो माह से एसएनसीयू में फेनो बारबिटोन सूई नहीं थी जिसके बाद 13 मार्च को यह सूई मंगवाई गई। साथ ही यहां चिकित्सकों की कमी भी है। डा.संतोष अभी यहां मरीजों को देखते है।

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