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2005 में बनी पानी टंकी से लोगों को आज तक नहीं मिल सका एक भी बूंद पानी, जानकारी होने के बावजूद मौन हैं जिम्मेदार

Madhubani News - मुख्यालय पंचायत के लाेगाें को नल का शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2005 में प्रखंड परिसर में करोड़ों रुपए व्यय कर 50...

Feb 22, 2020, 08:11 AM IST
Madhawapur News - people could not get a single drop of water from the water tank built in 2005 despite knowing it is silent

मुख्यालय पंचायत के लाेगाें को नल का शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2005 में प्रखंड परिसर में करोड़ों रुपए व्यय कर 50 हजार गैलन क्षमता के जलमीनार का निर्माण कराया गया था। इसके लिए बगल में ही बोरिंग धंसाकर पंप हाउस बनाया गया था। मुख्यालय परिसर, सीएचसी परिसर, एसएसबी कैंप, बस स्टैंड, पंचायत भवन, कृषि फॉर्म सहित संपूर्ण पंचायत क्षेत्र के एक से 14 वार्ड तक मुख्य पथ किनारे पाइप लाइन बिछाई गई थी। इसके साथ ही विभिन्न कार्यालयों, धार्मिक स्थल व चौक चौराहे पर बेस प्वाइंट निकालकर पक्के प्लेटफॉर्म के साथ पंचायतवासियों व राहगीरों के पानी पीने और हाथ-मुंह धोने के लिए नल की टोटी निकाली गई थी। अलग से विद्युत विभाग द्वारा 65 केवी के ट्रांसफॉर्मर लगाए गए थे। इसके ससमय सफल संचालन के लिए अस्थायी रूप से एक कर्मियों की नियुक्ति भी की गई जिसपर सरकारी कोष से भारी भरकम राशि खर्च की जा रही है। लेकिन बीते 15 वर्षों में करोड़ों रुपए का यह 50 हजार गैलन क्षमता वाली जलमीनार विभागीय अधिकारियों एवं कर्मियों की लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण पंचायत वासियों के सूखते हलक की प्यास बुझाने के लिए एक बूंद पानी उपलब्ध कराने में विफल रहा।

पुन: पाइप लाइन बिछाने का चल रहा है काम

पिछले करीब एक महीने से पंचायत क्षेत्र में पुनः प्लास्टिक की डेढ़ इंच चौड़ी पाइप लाइन बिछाने का कार्य पीएचईडी विभाग के ठेकेदार द्वारा युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि यह हो क्या रहा है। क्योंकि,वर्षों से विभाग के अधिकारी कह रहे थे कि यहां जलमीनार है। इसलिए 13 पंचायत वाले इस प्रखंड के मुख्यालय पंचायत में नल जल योजना के तहत काम नहीं होगा।बल्कि उसी जलमीनार के बोरिंग स्थल से निकली फूटी पाइप को बदलकर नए सिरे से इसे चालू किया जाएगा। लेकिन, पुनः विभाग द्वारा कुछ वार्डों में नल जल योजना के तहत बोरिंग भी धंसाया गया है और पाइप लाइन भी बिछाई गई है। लेकिन, जलमीनार के समीप दूसरा बोरिंग भी कराया गया है। किस स्तर पर लापरवाही बरती गई जो 15 वर्ष बाद पुनः बोरिंग गाड़ने और पाइप लाइन बिछाने की जरूरत पड़ी। जबकि, यह दो साल पहले तक चालू था। कुछ देर तक अस्थायी कर्मियों द्वारा बोरिंग चलाने पर पूरा परिसर जलमग्न हो जाता था।

मधवापुर प्रखंड परिसर में हो रहा काम।

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