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नि:स्वार्थ भाव से की गई भक्ति सभी प्रकार की सीमाओं का तोड़ देती है, ऐसे भक्तों को भगवान का दर्शन मिलता है

एक वर्ष पहले
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शहर के तिलक चाैक स्थित गाेकुलवली अाश्रम में चल रहे श्री सीताराम महायज्ञ सह अखंड नाम संकीर्तन के दसवें दिन के राम कथा के दौरान कथावाचक श्रीराम दास जी महाराज अवधवासी ने भगवान श्रीराम के वन में वर्षों से तपस्या कर रहे ऋषि, मुनियों व भक्तजनों के दर्शन दिए जाने के प्रसंग से कथा का प्रारंभ किया। ऋषि मुनियों को भगवान ने दर्शन देकर उनके तपस्या को फलीभूत किया। इसके बाद सबरी-राम मिलन के प्रसंग को सुनाया। भगवान श्रीराम को खिलाए जाने वाले झूठे बेर की मिठास का वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि प्रेम में इतनी सामर्थ्य होती है कि सभी प्रकार के मान-मर्यादा को मिटा देती है। रामायण की यह कथा हमें संदेश देती है कि नि:स्वार्थ भाव से की गई भक्ति सभी प्रकार के सीमाओं के तोड़ देती है। और ऐसे भक्तो को निश्चित रुप से भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है।

भगवान सबरी का उद्धार कर आगे बढतें हैं। इस दौरान वन में ही उनकी मुलाकात हनुमान से होती है। हनुमान प्रभु श्रीराम को सुग्रीव से मिलातें हैं। दोनों में मित्रता होती है। भगवान से मित्रता होने के बाद सुग्रीव अपनी पूरी आत्मकथा भगवान को सुनातें हैं। जिसमें अपने भाई बाली के आतंक व प्रताड़ना से पीड़त होने की कथा भी सुनातें हैं। इनकी कथा को सुनने के बाद भगवान श्रीराम बाली वध की योजना बनातें हैं। बाली का वध कर लंका चढाई की योजना बनती है। हनुमान को मैत्री संदेश लेकर लंका भेजा जाता है। पर रावन ने मैत्री संदेश को मानने से इंकार कर देता है। यहीं पर राम भक्त हनुमान की मुलाकात रावन के छोटे भाई विभीषण से होती है। माता सीता से मुलाकात करने के बाद लंका दहन का प्रसंग कथावाचक द्वारा सुनाया जाता है। लंका दहन का रोचक प्रसंग श्रोताओं को पूरी तरह से भाव-विभोर कर दिया।

आज होगी राम राज्य की स्थापना

कथा के अंतिम दिन राम-रावन युद्ध व रावन वध का प्रसंग होगा। रावन वध के बाद कथा सुनने आए श्रोता श्रद्धालुअों को लंका से भगवान श्री राम के अवध वापसी, राम राज्याभिषेक व राम राज्य आगमन की कथा सुनाई जाएगी। इस दौरान मंदिर के महंत विमल शरण, मीडिया प्रभारी मनोज कुमार मुन्ना, प्रकाश मंडल, जीवेंद्र मिश्र, लक्ष्मण राउत, विष्णु राउत, साकेत महासेठ, उदय जयसवाल, महेश सिंह, संजय पांडेय, शिव कुमार प्रधान, हरी प्रसाद साह, राजू राज, मोहन पंजियार, विध्नेश चंद्र झा सहित आश्रम व कमिटी के कई सदस्स मौजूद रहे।

कथा सुनाते श्रीराम दास जी महाराज अयोध्यावासी।
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