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केवट समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय चिंतन बैठक

Madhubani News - आजादी के 72 वर्ष बाद भी केवट समुदाय की हालत चिंताजनक है। हमारी हालत अनुसूचित जाति से अधिक खराब है। उक्त बातें...

Nov 11, 2019, 07:55 AM IST
आजादी के 72 वर्ष बाद भी केवट समुदाय की हालत चिंताजनक है। हमारी हालत अनुसूचित जाति से अधिक खराब है। उक्त बातें कैवत्र्त समाज के राष्ट्रीय महामंत्री काशीनाथ भंडारी ने झंझारपुर के रामकृष्ण मध्य विद्यालय मे आयोजित प्रदेश एवं जिला स्तरीय चिंतन बैठक में कहा। उन्होनें कहा कि बिहार जैसे राज्य में केवट समुदाय की जनसंख्या लगभग 70 लाख से अधिक है जो सभी क्षेत्रों में सरकार के उदासीन रवैये के कारण आज तक वंचित और उपेक्षित है। उन्होनें कहा कि अन्य प्रांतों में इस समुदाय को अनुसूचित जाति /जनजाति की दर्जा प्राप्त है। समुदाय के सर्वागिंण विकास के लिए कई मांगे भारत सरकार से लेकर बिहार सरकार तक की गयी है।

जिसमें केवट समुदाय को अनुसूचित जाति/ जनजाति की दर्जा देने, पुर्णिया विश्वविद्यालय का नाम अनुप रेणू विश्वविद्यालय करने, जनसंख्या के आधार पर राजनैतिक भागीदारी , सुपौल जिला के निर्मली महाविद्यालय का नाम के साथ भूमिदाता स्व नन्दलाल दास के नाम को जोड़ने की मांग किया है। अगर सरकार इस समाज की मांग पत्रों पर ध्यान नहीं दिया तो बिहार के अंदर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष श्रीकांत मंडल, श्रीनारायण भडारी, संजय कुमार चौधरी, द्वारिका प्रसाद मंडल, केदार नाथ भंडारी, सुबोध बिहारी सस्वरूप, रामबहादूर चौधरी, जयप्रकाष चौधरी, शशिकांत चौधरी, रामनाथ चौधरी, पंकज चौधरी, रामकृष्ण मंडल, प्रवेश कुमार, सीयाराम चौधरी, सत्यदेव प्रसाद कामति, देवकांत कामत, महेन्द्र कुमार कांति, इंद्रनारायण भंडारी, ललीत कुमार चौधरी, उदय कांत चौधरी, रमेश कुमार मंडल समेत कई वक्ताओं ने बैठक को सम्बोधित किया। जबकि इस कार्यक्रम की अध्यक्षता चुल्हाई कामत ने की।

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