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आज रात 11:26 बजे तक ही जलेगी होलिका, कल उत्तर फाल्गुन नक्षत्र और त्रिपुष्कर योग में खेला जाएगा रंग

एक वर्ष पहले
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जयनगर बॉर्डर क्षेत्र सहित जिले में होली का उमंग एवं उत्साह लोगों के चेहरे पर दिखने लगा हैं। चारो ओर लोग होली के तैयारी में जुटे हैं। 9 मार्च के रात 11:26 बजे तक होलिका दहन किया जाएगा। होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। होलिका दहन सोमवार को प्रदोषकाल से लेकर निशामुख रात्रि 11:26 बजे तक जलाई जाएगी। तीन मार्च से ही होलाष्टक शुरू है। इस बार सबसे खास बात ये है की होलिका दहन अत्यंत शुभ गज केसरी योग में बन रहा है। ज्योतिशास्त्र के अनुसार गज मतलब हाथी, केसरी मतलब शेर, हाथी और शेर का सम्बन्ध मतलब राजसी है। निष्ठा पूर्वक पूजा करने से अशुभ करके दूर भागता है। गज को गणेश जी का रूप माना जाता है। इस योग में व्यक्ति को फल उसकी राशि, नक्षत्र एवं गुरु की स्थिति के आधार पर प्राप्त होता है। 10 मार्च मंगलवार को उत्तर फाल्गुन नक्षत्र तथा त्रिपुष्कर योग में होली मनाई जाएगी। ज्योतिशास्त्र के अनुसार इस शुभ योग में होली मनाने से सुख, शांति एवं समृद्धि प्राप्त होती हैं। होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है। मिथिला पंचांग के अनुसार सोमवार को प्रदोषकाल से मध्य रात्रि तक होलिका जलाई जाएगी। वहीं, बनारसी पंचांग के मुताबिक प्रदोष काल से लेकर निशामुख रात्रि 11:26 बजे तक मनाया जाएगा। होलिका दहन के दिन प्रातः 6:08 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक भद्रा है। इसलिए होलिका दहन भद्रा के बाद किया जाएगा। भद्रा में होलिका दहन करने से हानि होती है। इसे अशुभ माना जाता है। होलिका का पूजा करते समय ॐ होलिकायै नमः मंत्र का उच्चारण करनी चाहिए। इस मंत्र की जाप करने से अनिष्ट कारक का नाश हो जाता है।

होली को लेकर जयनगर में खरीदारी करते लोग।
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