2 से 5 ट्राईकोग्रामा व टेलोनोमस रेमस को नियमित रूप से खेत में देना चाहिए

Motihari News - मक्के व धान की खेत में तबाही मचाने वाला फॉल आर्मी कीट से बचाव को लेकर जिला कृषि पदाधिकारी डॉ ओंकारनाथ सिंह ने...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:40 AM IST
Motihari News - 2 to 5 trichogramma and telonomus remus should be given regularly in the field
मक्के व धान की खेत में तबाही मचाने वाला फॉल आर्मी कीट से बचाव को लेकर जिला कृषि पदाधिकारी डॉ ओंकारनाथ सिंह ने बीएओ,कृषि समन्वयक,किसान सलाहकार व किसानों को निर्देश जारी किया है। साथ हीं कृषि कार्यालय के कृषि परामर्शी को इस कीट से बचाव को लेकर जरूरी उपाए करने को कहा है। निर्देश के आलोक में कृषि परामर्शी डॉ. मुकेश कुमार व रघुवंश कुमार सिंह ने मोतिहारी सदर प्रखंड के सिरसा माल पंचायत में लगे मक्के की फसल का अवलोकन किया। डॉ. मुकेश ने बताया कि जिले के कई प्रखंडों में फॉल आर्मी कीट का प्रकोप देखा गया है। यह कीट मक्का व धान की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर देती है। उन्होंने कहा की यह एक अंतर्राष्ट्रीय कीट है, जिसके प्रबंधन के लिए जिला से लेकर पंचायत स्तर तक मक्का व धान उत्पादन क्षेत्र का सघन सर्वेक्षण, इसकी पहचान और रोकथाम के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। कहा कि आकार में यह कीट भले ही छोटे हों, लेकिन इतनी जल्दी अपनी आबादी बढ़ाते हैं कि देखते ही देखते पूरा खेत साफ कर सकते हैं। इसका लार्वा मक्का, धान, ज्वार, गन्ना, गोभी सहित कई फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। क्योंकि इन कीटों को खत्म करना आसान नहीं होता है।

पहचान और लक्षण : इस कीट की मादा ज्यादातर पत्तियों के निचली सतह पर समूह में अंडे देती हैं। कभी-कभी यह पत्तियों के ऊपरी सतह और तना पर भी अंडे दे देती हैं। इसकी मादा एक से ज्यादा परत में अंडे देकर सफेद झाग से ढंक देती हैं। खेत में कीट के अंडे को बिना झाग के भी देखा जा सकता है। इसके अंडे हल्का सफेद से हरे व भूरे रंग के होते हैं।

इसकी पहचान और रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं

मक्के की फसल में लगा फॉल आर्मी कीट की पहचान करती जांच टीम।

फॉल आर्मी कीट का प्रबंधन एकीकृतनाशी जीव प्रबंधन के तहत प्रारंभिक अवस्था में अत्यधिक कारगर है। फसल की निगरानी एवं सर्वेक्षण नियमित करने के साथ,अंड परजीवी जैसे 2 से 5 ट्राईकोग्रामा कार्ड और टेलोनोमस रेमस को नियमित रूप से खेत में देना चाहिए। एनपीवी. 250 एलई, मेटारिजियम अनिसोप्ली और नोमेरिया रिलाई आदि जैविक कीटनाशकों का समय से प्रयोग करना चाहिए। यांत्रिक विधि के तौर पर संध्या काल में 3 से 4 की संख्या में प्रकाश प्रपंच एवं बर्ड पर्चर 6 से 8 की संख्या में प्रति एकड़ स्थापित जरूर करें। इसके अलावा रासायनिक कीटनाशक के रूप में डाईमेथेओएट 30 प्रतिशत, थायामेंथोक्जम 12.6 प्रतिशत+लैम्ब्डा स्यहेलोथ्रिन 9.5प्रतिशत का प्रयोग सही समय पर, सही मात्रा में, सही यंत्र से एवं सही विधि से करना चाहिए।

ऐसे करें प्रबंधन

सबसे पहले फॉल आर्मी कीट व सामान्य सैन्य कीट में अंतर को किसानों को समझना अत्यंत जरूरी है। फॉल आर्मी कीट की पहचान है कि इसका लार्वा भूरा, धूसर रंग का होता है, जिसके शरीर के साथ अलग से टयूबरकल दिखता है। इस कीट के लार्वा अवस्था में पीठ के नीचे तीन पतली सफेद धारियां और सिर पर एक अलग सफेद उल्टा अंग्रेजी शब्द का वाई ‘’दिखता है। इसके शरीर के दूसरे अंतिम खंड पर वर्गाकार चार बिंदु दिखाई देता है। अन्य खंड पर चार छोटे-छोटे बिंदु समलंब आकार में व्यवस्थित होते है। यह कीट फसल के लगभग सभी अवस्थाओं को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन इस कीट का प्रयोग मक्का के फसल पर अधिक होता है। यह कीट मक्का के पत्तों के साथ-साथ बाली को विशेष रूप से प्रभावित करता है। कीट का लार्वा मक्के के छोटे पौधा के डंठल आदि के अंदर घुसकर अपना भोजन प्राप्त करते हैं।

फॉल आर्मी कीट की प्रथम अवस्था ज्यादा नुकसानदायक होती है

फॉल आर्मी कीट के प्रथम अवस्था ज्यादा नुकसानदायक होता है। इसके प्रथम अवस्था सुंडी ज्यादातर पत्तियों के उपरी सतह को खुरचकर खाता है और सिल्क धागा बनाकर हवा के झोंके के माध्यम से एक पौधे से दूसरे, तीसरे पौधे तक पहुंचता है। जिसके कारण कीट की तीव्रता तेजी से शत प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

ऐसे करें पहचान

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