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5 बच्चों ने मुकम्मल किया कुरआन-ए-पाक, पगड़ी बांधने के साथ ही मेडल देकर किया गया सम्मानित

एक वर्ष पहले
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सिसवनिया में मदरसा बहरुल उलूम में गुरुवार को जलसा-ए-दस्तारबंदी का आयोजन किया गया। इसमें इस वर्ष कुरआन-ए-पाक मुकम्मल करने वाले पांच बच्चों को पगड़ी बांधी गयी। साथ ही उन्हें मेडल देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में करीब पांच हजार लोग शामिल हुए। जलसा को अनेक राज्यों से आए वक्ताओं ने संबोधित करते हुए बताया कि बेहद कम उम्र में इन बच्चों का कुरआन पाक मुकम्मल करना बड़ी बात है। शिक्षा के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा है। बिना शिक्षा के समाज में बदलाव संभव नहीं। वक्ताओं ने उपस्थित लोगों से विशेषकर महिला शिक्षा पर भी जोर देने की अपील की। कुरआन-ए-पाक मुकम्मल करने वाले बच्चों में सिसवनिया निवासी आलिम, दरभंगा निवासी हाफिज शरफे आलम व हाफिज हशमतुल्लाह, श्रीपुर निवासी हाफिज महफूज आलम तथा मोखलिसपुर निवासी हाफिज शफीकुर्रहमान शामिल हैं। कार्यक्रम की शुरुआत मुफ्ती मोहम्मद अनसार ने की। वही मंच का संचालन मौलाना मोतिउर्रहमान ने किया। वक्ताओं में मौलाना नजरूल मोबिन, मौलाना याकूब मुफ्ती, अब्दुल कादिर कासमी, मौलाना जलालुद्दीन कासमी, कारी महफूज, मौलाना तारिक अनवर, ओजैर अंजुम, कारी साजिद आदि शामिल थे। मौके पर मदरसा के महासचिव हाजी अताऊर रहमान, समाजसेवी तौसीफुर्रहमान, पंचायत समिति सदस्य अजीजुर्रहमान, फजलुल मोबीन आदि मौजूद थे।

पगड़ी और मेडल पाकर उत्साहित छात्र।
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