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मौसम जनित रोगों से प्रभावित 800 मरीज पहुंचे ओपीडी, 300 महिलाओं का हुअा इलाज, डॉक्टरों ने गर्मी से बचने की दी सलाह
पिछले एक सप्ताह से मौसम में हो रहे परिवर्तन से आम लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लगा है। दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जबकि रात में तेज
हवा के कारण पारा गिरने से लोगों को गुनगुने ठंड का एहसास हो रहा है। इसके कारण लोगों को मौसम जनित बीमारियों ने घेरना शुरू कर दिया है। मौसमी बीमारियों के कारण जिले के अस्पतालों में मरीजों की संख्या में बेतहासा वृद्धि हो रही है। सदर अस्पताल के
ओपीडी में गुरुवार को तकरीबन 800 मरीजों का इलाज किया गया। जिसमें 300 महिलाएं भी
शामिल थी। जबकि इमेरजेंसी में भी 50 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया गया।
मौसम जनित मरीजों की संख्या अधिक : सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों में सर्दी- जुकाम, बुखार, डिहाइड्रेशन, स्कीन डिजीज व फूड पॉयजनिंग के मरीजों की संख्या में एकाएक इजाफा हो गया है। ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ओपीडी में इस समय औसतन 600 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे है। गुरुवार को इलाज कराने आए 800 मरीजों में 300 से ज्यादा मरीज मौसमी बीमारियों के थे। इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन, व्यवस्था इतनी नहीं है।
मौसम में परिवर्तन के कारण बीमार हो रहे हैं लोग
सदर अस्पताल के डॉ. आरके वर्मा, डॉ. शत्रुघ्न कुमार, डॉ. सुरेश कुमार सिंह आदि ने बताया कि मौसम में परिवर्तन होने के कारण उल्टी, दस्त, पीलिया, पेट दर्द, बुखार व एलर्जी का प्रकोप अधिक होने का खतरा रहता है। इन दिनों मच्छरों की भरमार से मलेरिया भी दस्तक दे सकता है। थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर सकती है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरुचि स्मृति, डॉ. हेना चन्द्रा ने बताया कि महिलाओं को गर्मी से बचकर रहना चाहिए। गर्भवतियों के लिए तो यह मौसम घर में ही रहकर आराम करने का है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमार अमृतांशु के मुताबिक छोटे बच्चों को विशेषकर गर्मी से बचाने की जरूरत होती है।
सदर अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या।