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‘नारद जी से दिव्य दृष्टि मिलने के बाद भोलेनाथ को समझ पाईं सती और पार्वती के रूप में जन्म लेकर हो गईं अमर’

Motihari News - नरसिंह बाबा मंदिर परिसर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित सात दिवसीय शिव कथा के तीसरे दिन रविवार को...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:40 AM IST
Motihari News - after getting divine vision from narada ji she was able to understand bholenath and became immortal by taking birth as sati and parvati
नरसिंह बाबा मंदिर परिसर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित सात दिवसीय शिव कथा के तीसरे दिन रविवार को कथावाचक अभेदानंदजी ने शिव विवाह प्रसंग की चर्चा में भगवान शिव व पार्वती के मिलन को आत्मा व परमात्मा का मिलन बताया।

सती को माता पार्वती बनने तक का प्रसंग सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि पार्वती 108 वर्ष जन्म पूर्व दक्ष की पुत्री सती थी। सती सतगुरु के शरणागति न प्राप्त होने की वजह से शिव को साकार रूप ही समझती रही। जबकि, शिव तो निराकार ज्योतिर्मय पारब्रह्म हैं, जिसे सती नहीं समझ पाई। जब वह अगस्त मुनि के आश्रम में गई तो, वहां सत्संग भी ध्यान से नहीं सुना। उसे दक्षायणी होने का अहंकार था, उनका कहना था कि मैं शिव की अर्धांगिनी हूं मुझे तो शिव रोज ही सत्संग सुनाते हैं मुझे अगस्त मुनि के पास सत्संग श्रवण करने की क्या आवश्यकता। अगस्त मुनि का सम्मान ना करने की वजह से वह दिव्य दृष्टि के द्वारा प्रभु की वास्तविकता को समझ नहीं पाई। उन्होंने प्रभु राम पर भी संदेह किया। इस वजह से भोलेनाथ समाधि में चले गए। इस पर सती बहुत रोई और जब शिव समाधि से लौटे, तो वह उनकी आज्ञा का उल्लंघन कर दक्ष के यज्ञ में चली गईं।

वहां शिव का आसन न देख कर वह अपने आप को यज्ञ में ही तप अग्नि में जला दी। इस बीच उन्होंने भोलेनाथ से प्रार्थना की, ‘मरते समय मुझे एक जन्म और देना, ताकि मैं सत्संग को समझ पाऊं... मैं आपकी आज्ञा का पालन कर पाऊं... मैं आपकी सेवा कर पाऊं...।’ प्रार्थना भगवान ने सुन ली और वह पार्वती बनकर आई और देव ऋषि नारद को अपना गुरु बनाया। नारदजी ने उन्हें दिव्य दृष्टि दी। तब वह भोलेनाथ को समझी और अपने जन्म को सफल की। पार्वती के 108 जन्म से वह पूर्व बार-बार जन्मी और मरी। लेकिन पार्वती के जन्म के बाद वह अमर हो गईं। कथावाचक ने कहा कि हमारी आत्मा भी पार्वती है। कथा के मुख्य यजमान थे मनोज कुमार व रेनू देवी। मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

नरसिंह बाबा मैदान में आयोजित शिव कथा में प्रवचन सुनाते आचार्य।

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