लोकसभा चुनाव में रक्सौल हवाई अड्डा किसी भी पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र में शामिल न हो सका

Motihari News - 1962 में भारत चीन-युद्ध के समय केंद्र सरकार ने सेना के विशेष लैंडिंग के लिए रक्सौल हवाई अड्डे निर्माण कराया था। जो...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:55 AM IST
Raxaul News - in the lok sabha elections raxaul airport could not be included in any party39s manifesto
1962 में भारत चीन-युद्ध के समय केंद्र सरकार ने सेना के विशेष लैंडिंग के लिए रक्सौल हवाई अड्डे निर्माण कराया था। जो बेतिया लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़नेवाला सीमांचल का एक मात्र राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यह हवाई अड्डा किसी भी उम्मीदवार की चुनाव घोषणा में शामिल न हो सका। जबकि, रक्सौल हवाई अड्डे से उड़ान शुरू होने पर उत्तर बिहार का हवाई मार्ग काफी सुगम हो जायेगा। इसके साथ ही बिहार में भागलपुर, गया के अलावा अन्य जगहों पर भी लैंडिंग के लिए हवाई अड्डे का निर्माण कराया गया था, जो फिलहाल बंद पड़ा है। मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विवि खुलने पर उत्तर बिहार के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब रक्सौल हवाई अड्डा से पुन: उड़ान शुरू हो जायेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और न ही किसी दल ने वर्तमान लोकसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाया ।

रक्सौल शहर से तीन किलोमीटर स्थित पनटोका पंचायत में यह हवाई अड्डा कई एकड़ भूमि में बना है। यहां कुछ भू -भाग खाली है । कुछ भू-भाग पर किसान खेती करते है।1960 में इस हवाई अड्डा की परिकल्पना की गई थी। 1968 में एयर सर्विस की शुरूआत भी हुई थी। लेकिन 1970 में फिर इस सेवा को बंद कर दिया गया। उसके बाद से यह क्षेत्र वीरान पड़ा है। समय के साथ क्षेत्र की आबादी बढ़ी। आसपास के क्षेत्रों में लोग बसने लगे। बहुमंजिला इमारत बनने लगे। बीच के दिनों में इस हवाई अड्डा को चालू करने की कवायद भी शुरू की गई थी। लेकिन यह सपना अभी भी पूरा नहीं हो सका। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ऐतिहासिक रक्सौल का हवाई अड्डा की अपनी अलग पहचान है। इसका निर्माण सुरक्षा के दृष्टिकोण से तत्कालीन सेनाध्यक्ष और प्रधानमंत्री के सुझाव पर किया गया था। निर्माण के दौरान देश के दमदम हवाई अड्डा के बाद देश का यह दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट था। इसका निर्माण सुरक्षा के अलावा देशी-विदेशी पर्यटकों और यात्री सुविधा के लिए किया गया था।

इन दिनों हवाई अड्डा का उपयोग खेत व खलिहान के रूप में स्थानीय किसान कर रहे हैं। इसके भवन पर एसएसबी का कब्जा है। इसे शुरू करने के लिए सरकार के स्तर से कवायद जरूर शुरू की गई, लेकिन उड़ान शुरू नहीं हो सकी। पिछले कई वर्षों से हर सरकार उड़ान शुरू करने का वादा करती रही है, पर इसे पूरा नहीं किया जा सका है। इस हवाई अड्डा के शुरू होने से रक्सौल सड़क, रेल, हवाई मार्ग से सीधा जुड़ जाएगा। जिससे कार्गो के अलावा यात्री हवाई जहाज सीधा रक्सौल के रास्ते नेपाल के लिए उड़ान भर सकेंगे।

राज्य के चुने अन्य हवाई अड्डा में रक्सौल को किया गया था शामिल : केंद्र सरकार ने देश के दर्जनों हवाई अड्डा को शुरू करने के लिए योजना बनाई थी, जिसमें राज्य के दो हवाई अड्डा को चयनित किया था । इसमें रक्सौल व मुजफ्फरपुर का हवाई अड्डा शामिल था । सरकार ने दुर्गम क्षेत्रों को हवाई सेवा से जोडऩे के लिए योजना बनाई थी , जिसके लिए केंद्र व राज्य सरकार दोनों के मिलकर हवाई अड्डा को शुरू करने में सहयोग करने की बात कही गई थी। हवाई यात्रा सस्ता व जहाज कंपनियों को बेहतर सुविधा देने का भी निर्णय लिया गया था। अनुदान की राशि रख-रखाव व सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी नियम बनाए गए थे। अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले रक्सौल शहर को हवाई सेवा से जोडऩे के लिए पिछले एक दशक से प्रयास किया जा रहा था। सरकार द्वारा इस एयरपोर्ट को चयनित किए जाने से सीमा क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी थी।

हवाई अड्डा का क्या है क्षेत्रफल : रक्सौल प्रखंड के पनटोका पंचायत के सीमावर्ती हरैया गांव में स्थित सिविल एविएशन का एयरपोर्ट सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इस दृष्टि का क्षेत्रफल करीब दो किलोमीटर लंबा व एक किलोमीटर चौड़ा है। वर्तमान में इस हवाई अड्डा परिसर में एसएसबी 13 वीं बटालियन का बीओपी संचालित है।

रनवे की बतर हालत व अन्य भू भाग पर खेती करती किसान

रक्सौल हवाई अड्डा देश का दूसरा बड़ा एयरपोर्ट था

भारत-चीन युद्ध के बाद जनरल केएम करियप्पा ने सीमा क्षेत्र का दौरा किया था, जिसमें युद्ध के दौरान सैन्य सामग्री व हवाई हमले के लिए सबसे बेहतर स्थल के रूप में चयन किया। सरकार ने 60 के दशक में दमदम एयरपोर्ट के बाद देश के दूसरे बड़े हवाई अड्डा का निर्माण रक्सौल में किया। जबकि नेपाल ने चीन के सहयोग से सीमावर्ती पर्सा, बारा, रौतहट, नवलपरासी आदि जिला में आधा दर्जन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण कर उड़ान शुरू कर दिया है। ऐसा मानना है कि रक्सौल से प्रतिदिन नेपाल के अलावा भारत के दिल्ली, कोलकाता, पटना, लखनऊ, चेन्नई आदि के लिए यात्री हवाई जहाज की उड़ानें हो सकती है। रक्सौल से महज 20 किमी दर नेपाल के बारा के सेमरा एयरपोर्ट से रोज चार हवाई जहाज उड़ान भरते हैं।

हवाई अड्डा के चालू होने पर से बढ़ सकती थीं सुविधाएं

दुर्गम क्षेत्रों को जोडऩे के लिए शुरू की गई योजना में काफी सुविधा कंपनियों व चालकों को मिलेगी। तेल खर्च पर से टैक्स हटेगा। चालकों को रात्रि विश्राम, रनवे टैक्स, प्रोपर्टी टैक्स, लैंडिंग व पार्किंग टैक्स आदि में छूट मिलेगी। इसके लिए सरकार पांच से 10 वर्षों तक अनुदान की बात कही थी , जिससे सस्ते दर पर बेहतर सेवा दुर्गम क्षेत्र के लोगों को मिले। सरकार ने जो दर्जनों हवाई अड्डा को शुरू करने की सूची तैयार की थी। उसमें रक्सौल एयरपोर्ट 89 तथा मुजफ्फरपुर 69 नंबर पर थी। हाल में चाहरदीवारी बनाकर इस हवाई अड्डा को सुरक्षित किया गया है।

देश व विदेश के यात्रियों को मिलेगा लाभ

सीमा जागरण मंच के प्रदेश अध्यक्ष महेश अग्रवाल ने कहा कि रक्सौल के विकास के लिए हवाई अड्डा शीघ्र शुरू करना आवश्यक है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों ने लगातार आश्वासन दिया, परंतु इससे उड़ाने शुरू नहीं हुई। भारत विकास परिषद के महामंत्री रमेश शिकारिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के शहर रक्सौल विश्व के मानचित्र पर भारत-नेपाल सीमा के प्रमुख बॉर्डर के रूप में चिन्हित है। परंतु एयरपोर्ट का हाल गजब है। जनप्रतिनिधि चुनाव के समय हवाई अड्डा की बात करते हैं, लेकिन, चुनाव के बाद इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। हवाई अड्डा शुरू होने से यात्री सुविधा के अलावा राजस्व की प्राप्ति भी होगी। इसी प्रकार प्रो.कृष्णा सिंह ,प्रो. प्रदीप श्रीवास्तव ,प्रो.संजय सिंह,प्रो.वृजमोहन प्रसाद ने कहा कि इस हवाई अड्डा के प्रारंभ होने से क्षेत्र का विकास होगा।

1962 में एयरपोर्ट का कराया गया था निर्माण

चंपारण गजेटियर के अनुसार भारत-चीन के बीच उत्पन्न तनाव के मद्देनजर 1960 में इसका निर्माण किया गया। 1962 तक योजनाबद्ध तरीके से इसका आधुनिकीकरण व रख-रखाव चलता रहा। 1968 में रक्सौल, मुजफ्फरपुर व भागलपुर के लिए कङ्क्षलग एयर सर्विस शुरू हुआ। इसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से 70 के दशक में इसे बंद कर दिया गया।

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