अवैध सेंटरों में इंडियन-नेपाली करंसी की अदला-बदली

Motihari News - भारत नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण रेलवे भूमि में तीन दर्जन अवैध सटही काउंटर संचालित है। जो पांच से 10 रुपए तक...

Jan 16, 2020, 09:05 AM IST
Raxaul News - indian nepali currency swaps in illegal centers
भारत नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण रेलवे भूमि में तीन दर्जन अवैध सटही काउंटर संचालित है। जो पांच से 10 रुपए तक मनमाना बाटा लेकर मालामाल हो रहे हैं। इससे न केवल भारत अपितु नेपाल सरकार को भी राजस्व की क्षति होती है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण रक्सौल में नेपाली और नेपाल में भारतीय मुद्रा की लेन-देन होती रही है। भारत नेपाल के सभी सीमाओं के में मात्र रक्सौल ही एक ऐसा सीमावर्ती शहर है जहां बड़े पैमाने पर अवैध सटही कारोबार का धंधा होता है। राष्ट्रीयकृत बैंक के द्वारा सरकारी एक्सचेंज काउंटर नहीं खोले जाने का लाभ उठाकर दशकों पूर्व से अवैध सटही का धंधा बड़े पैमाने पर जारी है। शहर के बाटा चौक से लेकर रेलवे फाटक 33 ए के उस पार तक लाईन से सटही काउन्टर का दुकान लगा रहता है।प्रतिदिन सुबह 4 बजे से ही खुल जाता है सटही काउण्टर। जो रात्री के 11 बजे तक चलता है। पांच से दस रुपए नेपाली तक सटही काउंटर संचालकों द्वारा मनमाना बाटा लेकर नेपाली से इंडियन और इंडियन से नेपाली रुपए की अदला बदली की जाती है। इसके एवज में पांच से दस रुपए सैकड़ा के दर से बाटा लिया जाता है। भारत से नेपाल जानेवाले पर्यटकों और नेपाल से भारत जानेवाले व्यापारी, पर्यटक व अन्य लोगों को एक दूसरे देश के नोटों की जरूरत पड़ती है। इसके लिए इन्हीं अवैध सटही कारोबारियों से रुपए की अदला बदली करने की विवशता है। जबकि नेपाल के वीरगंज में नेपाल राष्ट्र बैंक में एक सौ रुपए का मात्र 25 पैसा सरकारी दर से बाटा लिया जाता है। वहीं रक्सौल में मुंहमांगी दर पर बाटा लिए जाने से कारोबारी को काफी मुनाफा होता है। रक्सौल में सरकारी स्तर पर सटही काउंटर खोले जाने की मांग कई समाजसेवियों ने पीएमओ तक किया मगर इस मामले में अभी तक कोई सकारात्मक कदम सरकार द्वारा नहीं उठाए जाने के कारण इन अवैध सटही कारोबारियों का हौसला बुलंद है।

सटही दुकानदार से पैसा एक्सचेंज कराता युवक।

पल्ला झाड़ने और एक -दूसरे पर थोपने में लगे हैं अधिकारी

सबसे हैरतअंगेज बात तो यह है कि दशकों पूर्व से यह अवैध धंधा चल रहा है मगर अबतक इसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक कारोबारी ने बताया कि रेलवे से लेकर रक्सौल के सभी उच्चाधिकारियों को एक निश्चित राशि दी जाती है। इस बाबत एसडीएम से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया, मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। रेलवे के सेक्शन इंजीनियर तपश राय ने बताया कि हम नहीं जानते हैं। आरपीएफ वाले लोग जानते हैं। इस प्रकार एक-दूसरे पर थोप कर अपना पल्ला झाड़ लिए रेल अधिकारी। आसपास के लोगों का आरोप है कि रेलवे भूमि मे यह धंधा चल रहा है। इसलिए सेक्शन इंजीनियर भी इसमें संलिप्त है।

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