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महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए सामाजिक बंधन को समाप्त करना जरूरी, कानूनी सहायता मिले : प्रो. आशीष

Motihari News - एजुकेशन रिपोर्टर | मोतिहारी लक्ष्मी नारायण दुबे महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से मानवाधिकार दिवस...

Dec 11, 2019, 08:11 AM IST
Motihari News - legal empowerment is necessary to end social bond for the empowerment of women prof ashish
एजुकेशन रिपोर्टर | मोतिहारी

लक्ष्मी नारायण दुबे महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से मानवाधिकार दिवस पर मंगलवार को किशोरियों एवं महिलाओं के विरुद्ध शारीरिक, मानसिक एवं लैंगिक हिंसा के निवारण हेतु सशक्तीकरण एवं परिस्थितिक संवेदनशीलता विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्घाटन प्राचार्य प्रो अरुण कुमार, श्रीकृष्ण सिन्हा महिला महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. र|ेश आनंद, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष प्रो. आशीष श्रीवास्तव व अन्य ने संयुक्त रूप से दीप जला कर किया। बीएड के विभागाध्यक्ष प्रो परमानंद त्रिपाठी व प्रो दुर्गेश मणि तिवारी ने कार्यक्रम के आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। बताया कि हिंसा से ग्रसित किशोरियों/महिलाओं को सामाजिक, कानूनी एवं मानसिक सहायता प्रदान करने हेतु इस जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला दो सत्रों में आयोजित की गई। उद्घाटन सत्र तथा तकनीकी सत्र। उद्घाटन सत्र के दौरान आगंतुक अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य डा अरुण कुमार ने कहा कि अभिभावकों द्वारा पुत्रियों की भांति पुत्रों की भी निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने सामाजिक समता की स्थापना के लिए छात्राओं का आह्वान किया। महिला कॉलेज के प्राचार्य प्रो र|ेश आनंद ने सैद्धांतिक महिला अधिकारों की प्राप्ति हेतु धरातल पर क्रियान्वयन की बात कही। बतौर मुख्य वक्ता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने महिलाओं के लिए सामाजिक बंधन को समाप्त करने पर जोर दिया। दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ राजेश कुमार सिन्हा ने नैतिक उत्तरदायित्व एवं सम्यक कर्तव्य निर्वहन का परामर्श दिया। उन्होंने भावनात्मक पहलुओं की अपेक्षा बौद्धिक पहलुओं को प्राथमिकता देने के लिए अभिकथित किया। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. परमानंद त्रिपाठी ने कार्यशाला की विषय वस्तु का संक्षिप्त परिचय कराते हुए महिला अधिकारों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अवगत कराया।वही महिला थानाप्रभारी मो. अकबर ने सीआईडी के निर्देशानुसार किशोरियों/छात्राओं/महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ उदाहरणों द्वारा सावधानी बरतने की सलाह दी। अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दुर्गेश मणि तिवारी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणा पत्र का पठन किया।

लक्ष्मी नारायण दुबे महाविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में अपनी बात रखते प्राचार्य।

मानसिक एवं लैंगिक हिंसा के निवारण पर हुअा गहन मंथन

राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कुमार राकेश रंजन ने 21वीं शताब्दी में किशोरियों/महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती शारीरिक, मानसिक एवं लैंगिक हिंसा के निवारण पर गहन मंथन किया। अपराह्न के तकनीकी सत्र में महिला थाना की सामाजिक कार्यकर्ता दीपावली चौहान एवं सुनीता कुमारी ने किशोरियों/महिलाओं के विरुद्ध हिंसा निवारण के लिए पावर प्वाइंट के माध्यम से विभिन्न उपाय सुझाए। मौके पर भौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पिनाकी लाहा, वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद कुमार, हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राधे श्याम, शिक्षा विभाग के प्रो. पीआर झा, प्रधान सहायक राजीव कुमार सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षकेतर कर्मचारी, छात्र/छात्राएं उपस्थित हुए। सत्रांत में 60 प्रतिभागी छात्राओं के बीच प्रमाणपत्र का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन एनएसएस के कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. दुर्गेश मणि तिवारी एवं धन्यवाद ज्ञापन मीडिया कोषांग प्रभारी डॉ. कुमार राकेश रंजन ने किया।

शिक्षा के वास्तविक रूप को समाज में सर्वत्र फैलाएं

मोतिहारी | महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में मंगलवार को चाणक्य परिसर में मानवाधिकार दिवस पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान में मुख्य वक्ता एससी रॉय (चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना) और सामाजिक कार्यकर्ता सुमन सिंह ने अपना वक्तव्य दिया। सुमन सिंह ने व्याख्यान की शुरुआत समाज में लड़कियों के जन्म लेने अर्थात उनके भ्रूण हत्या की समस्या से की। उन्होंने कहा कि लगभग 36000 ऐसे मामले प्रतिवर्ष संज्ञान में आते हैं। यह बड़ा आंकड़ा है। चिंतनीय है। उन्होंने बच्चों के पोषाहार से लेकर, बाल यौन शोषण, बाल विवाह (इसके सांस्कृतिक और सामाजिक कारण), बाल मजदूरी, वैध व इच्छित यौन संबंध से लेकर मजदूरों के जीवन-स्तर संबंधी मुद्दों पर ध्यानाकर्षित किया। वहीं प्रो. रॉय ने संयुक्त राष्ट्र संघ के अस्तित्व में आने के बाद तथा युद्ध की विभिषिकाओं के मद्देनजर मानवाधिकार पर विश्व समुदाय की जागरूकता की बात की। उन्होंने कानूनी और नैतिकता दोनों पहलुओं के सम्मिश्रण से मनुष्यता के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों विद्वानों ने शिक्षा के वास्तविक रूप को समाज में सर्वत्र फैलाने की आवश्यकता बताई। धन्यवाद ज्ञापन सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रो राजीव कुमार ने किया। प्रो राजीव कुमार ने वक्ताओं का धन्यवाद देते हुए भविष्य में जीवन-शिक्षा पर कार्यशालाओं के आयोजन की बात कही। संचालन डॉ. नरेंद्र आर्या ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं ने शिरकत किया।

मानवाधिकार की रक्षा को सक्रिय होकर आगे आने की आवश्यकता

मोतिहारी|अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की एक बैठक हुई। शहर के भवानीपुर जिरात स्थित बाल ज्ञान लोक शिक्षण संस्थान परिसर में हुई बैठक की अध्यक्षता अवधेश चंद्र श्रीवास्तव ने की। इस मौके पर संगठन के तिरहुत प्रमंडल के महासचिव बिनोद प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि महात्मा गांधी ने समाज के जिस अंतिम व्यक्ति की कल्पना की थी, इस पर मानवाधिकार आयोग एवं मानवाधिकार से संबंधित संगठनों ने उसके हक व हकूक की रक्षा पर खास जोर दिया है। मानव के अधिकार की रक्षा में सभी जागरुक लोगों को सक्रिय होकर आगे आना चाहिए। ताकि, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, अत्याचार आदि पर अंकुश लग सके।

कार्यशाला में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक व छात्राएं।

कार्यक्रम में अपनी बात रखते अतिथि व उपस्थित अन्य।

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