संस्कृत उच्च विद्यालय के मैदान में लगा कचरे का अंबार, नहीं होते खेल

Motihari News - सोमेश्वर नाथ संस्कृत उच्च विद्यालय परिसर का खेल मैदान अपनी गरिमा को खोता जा रहा है। यह मैदान अब न खेलने लायक रह गया...

Bhaskar News Network

Jun 15, 2019, 06:20 AM IST
Areraj News - trash of waste in sanskrit high school grounds not sport
सोमेश्वर नाथ संस्कृत उच्च विद्यालय परिसर का खेल मैदान अपनी गरिमा को खोता जा रहा है। यह मैदान अब न खेलने लायक रह गया है और न लोगों के टहलने लायक। यहां कूड़ा कचरा का अंबार लगा है।

साथ ही यह मैदान उबड़-खाबड़ हो गया है। जहां न बच्चे खेल सकते हैं। न लोग टहल सकते हैं। जगह-जगह छोटे-बड़े गड्ढे बने हैं। साल में एक दर्जन से अधिक बार अरेराज में मेला लगता है। जिसमें बसंत पंचमी, महाशिवरात्रि, एक महीने तक चलने वाले श्रावणी मेला, अनंत चतुर्दशी मेला शामिल है।

मेले के आयोजन के समय खेल मैदान को वाहनों का पड़ाव स्थल बनाया जाता है। साथ ही आने वाले श्रद्धालु कांवरियों यहां ठहरते हैं। वे लोग भोजन बनाने के लिए गड्ढा खोद कर चूल्हा बनाते हैं। यहां अस्थाई दुकानें भी लगती है। दुकानदार गड्ढा खोद कर बांस बल्ला लगाते हैं। जिससे मैदान का स्वरूप बदल गया है। मैदान में जगह-जगह कचरा फैला है। जिससे बदबू आने से लोग इधर से आना जाना छोड़ दिए हैं।

यह कहते हैं अधिकारी| नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि जल्द ही खेल मैदान व स्टेडियम के आसपास में जमा कूड़ा कचरा को हटाया जाएगा। ताकि सुंदर अरेराज की कल्पना को साकार किया जा सके।

लगते हैं महाशिवरात्रि, श्रावणी व अनंत चतुर्दशी मेले

संस्कृत उच्च विद्यालय के खेल मैदान में जमा कचरा व उगे घास।

मैदान में कभी लगता था खिलाड़ियों का जमावड़ा

एक समय था जब दोपहर तीन बजे के बाद यहां क्षेत्र के खिलाड़ियों आकर अपना प्रैक्टिस करते थे। 1940 से लेकर 1956-57 तक फुटबॉल के तूफान टीम का जलवा स्थानीय जिला के अलावा अन्य जिलों में भी था। इस टीम का कोई सानी नहीं था। फुटबॉल तूफान टीम के एकमात्र सदस्य खिलाड़ी व चाचाजी के नाम से मशहूर मो सलीम आजाद की मानें तो आसपास की कौन कहे दूर-दूर के खिलाड़ी भी यहां खेल कर अपने को भाग्यशाली समझते थे। कारण था काशी की तर्ज पर एक ही कैम्पस में विभिन्न विद्यालयों का होना, जहां अधिकांश बच्चे पढ़ते हैं।

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