‘परमात्मा को देखने के लिए दिव्य दृष्टि जरूरी’
श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन शनिवार को कथावाचन करते हुए साध्वी स्वाति भारती ने कथा का महत्व बताया। उन्होंने कथा के माध्यम से नारियों को पुनर्जागरण की प्रेरणा दी। साथ ही स्कंद पुराण में भगवान शिव द्वारा बताएं आत्म तीर्थ का भी ज्ञान कराया।
उन्होंने परमात्मा को दिव्य दृष्टि से देखे जाने की बात कही तथा कहा कि फूल में सुगंध, तिल में तेल, लकड़ी में अग्नि की तरह मानव शरीर में परमात्मा मौजूद है। जैसे माइक्रोस्कोप के जरिए सूक्ष्म जीवाणुओं को देखा जा सकता है उसी तरह दिव्य दृष्टि से परमात्मा को देखा जा जा सकता है। जरूरत है अध्यात्म विज्ञान सद्गुरु के पास जाकर उसे डिकोड करने का विधि जानने की। कथा के दौरान मधुर भजनों की प्रस्तुति पुष्पा भारती, सरिता भारती, शीतल भारती और प्रीति भारती के द्वारा किया गया। भजन एवं संगीत में ताल गुरु भाई दे रहे थे। कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन विशाल पंडाल में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी थी, जो देखते ही बन रही थी।
भारतीय ज्ञान मीमांसा का विमोचन
मुंगेर | मुंगेर विश्वविद्यालय के आरडी एंड डीजे कॉलेज में दर्शनशास्त्र विषय की विभागाध्यक्ष डा. मंजु कुमारी की पुस्तक भारतीय ज्ञान मीमांसा का विमोचन शनिवार को कॉलेज पुस्तकालय के अध्ययन कक्ष में एक सादे समारोह में किया गया। मौके पर मुंगेर विवि के कुलपति डा. रंजीत कुमार वर्मा, विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रति कुलपति डा. कुसुम कुमारी, कुलसचिव कर्नल विजय कुमार ठाकुर, विवि प्राचार्य, टीएमबीयू डा. पीएन मंडल, डा. शंभू प्रसाद सिंह मौजूद थे। अतिथियों के हाथों पुस्तक का विमोचन किया गया। समारोह का संचालन प्रो. विद्या चौधरी ने किया।
वीसी डॉ. वर्मा ने डा. मंजु गुप्ता को बधाई देते हुए कहा कि यह मुंगेर विवि के लिए गौरव की बात है। डा. मंजु ने बारीकी से पुस्तक में ज्ञान मीमांसा के तत्वों का समावेश किया है। पुस्तक लेखन अध्यवसाय से जुड़ी हुई चीज हैं। अतिथियों ने कहा कि दर्शनशास्त्र विषय ही ज्ञान मीमांसा का है। उसमें लेखक ने भारतीय ज्ञान क्षेत्र के दायरे में जो ज्ञान मीमांसा का जिक्र किया है, वह काबिले तारीफ है। मौके पर प्रो. राजकिशोर प्रसाद सिन्हा, प्रो. अजय कुमार, डा. बीसी पांडेय, प्रो. संजय भारती, डा. एसके गुप्ता, डा. देवराज सुमन, प्रो. मुनीन्द्र कुमार, डा. विश्वजीत कुमार सहित अन्य उपस्थित थे।
पुस्तक विमोचन करते कुलपति व अन्य।
कथावाचन करती साध्वी भारती।