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सत्ती स्थान गांव में 200 वर्षों से नहीं मनाई जाती होली

एक वर्ष पहले
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{गांव के किसी भी घर में पुआ-पकवान नहीं बनता, ग्रामीणों ने बनवाया है मंदिर

एक ओर जहां चारों ओर होली का उत्साह चढ़ा हुआ है, वहीं प्रखंड कार्यालय के समीप अवस्थित सती स्थान गांव में सन्नाटा पसरा है। इस गांव में लगभग 200 वर्षों से होली नहीं मनाई जाती है। गांव में होली के दिन सन्नाटा पसरा रहता है। ग्रामीण न तो एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हैं और ना हीं घरों में पकवान बनाते हैं।

यहां तक कि दूसरे गांव के लोग भी इन गांव के लोगों पर रंग नहीं डालते हैं। गांव में होली नहीं मनाने के पीछे पौराणिक मान्यता है। मान्यता के अनुसार कई सौ पूर्व में गांव में एक वृद्ध दंपत्ति रहते थे। उस दंपत्ति की पतिव्रता नारी की चर्चा चारों ओर होती थी। फागुन महीने में पति की मौत के बाद इस घटना से आहत प|ी ने पति के साथ सती होने की इच्छा जाहिर की। लेकिन गांव वालों ने प|ी को घर में बंद कर दिया। पति की अर्थी शमशान जाने के दौरान उनका शव बार-बार गिर जाता था। ग्रामीण लाचार होकर प|ी को घर से बुला लाए।

वृद्ध महिला की अंगुली से निकली आग, हो गई सती| इस बीच जब प|ी श्मशान घाट पर पहुंची तो पति का शव चिता पर जल रहा था, उसी वक्त प|ी की अंगुली से आग की लपट निकली और देखते ही देखते दोनों जलकर भस्म हो गए। इसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से सती स्थल पर मंदिर का निर्माण किया गया है। तब से वहां मां सती की पूजा अर्चना किया जाने लगा।

दूसरे गांव में बस चुके लोग नहीं मनाते होली

गांव के बुजुर्ग महेश सिंह ने बताया कि फागुन महीने में मां सती हुई थी इसलिए गांव में होली नहीं मनाई जाती है न पकवान बनाई जाती है। ग्रामीण जलधर सिंह ने बताया कि हमारे गांव के जितने लोगों ने दूसरे गांव जाकर घर बनाए हैं वह भी होली नहीं मनाते हैं। सती स्थान एवं बड़ी कोरियन के ग्रामीण चैत्र राम नवमी के अवसर पर पकवान बनाते हैं। परंपरा तोड़ने पर घर में हानि होनी की बात भी लोगों ने कही।

सती मां का मंदिर।

सती मां का मंदिर व मंदिर के सामने खड़े ग्रामीण।
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