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एसडीओ और डीएसपी ऑफिस वाले 19 अनुमंडल मुख्यालय अब भी गांव

एक वर्ष पहले
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राज्य के 19 अनुमंडल मुख्यालय अब भी गांव की श्रेणी में हैं। अनुमंडल मुख्यालयाें में एसडीओ और डीएसपी ऑफिस रहता है। वहां जमीन की रजिस्ट्री वाले निबंधन कार्यालय भी होते हैं। जिला मुख्यालय में डीएम और एसपी बैठते हैं। वे अनुमंडल मुख्यालयों में तैनात अपने मातहत एसडीओ और डीएसपी के माध्यम से जिले के प्रशासनिक कार्य कराते हैं। पर, आजादी के 73 साल बाद भी 19 अनुमंडल मुख्यालय ग्राम पंचायत हैं। वहां शहर की सुविधाएं नहीं हैं। नगर निकाय की श्रेणी में नहीं आने से ऐसे 19 अनुमंडल मुख्यालयों में मेयर या अध्यक्ष नहीं होते हैं। वहां के लोगों तक विकास की राेशनी पहुंचाने के लिए मुखिया जी ग्राम सभा का आयोजन करते हैं। वहीं प्रशासनिक दृष्टिकोण से अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले कई ऐसे प्रखंड मुख्यालय हैं, जिन्हें नगर पंचायत बनाकर वहां शहर जैसी आधारभूत संरचना की स्थापना की जाती है। सरकार ने शहरीकरण से वंचित इन अनुमंडल मुख्यालयों को शहर की श्रेणी में लाने का निर्णय लिया है। राज्य के 143 नगर निकायों में 12 नगर निगम हैं। विकास की सबसे अधिक राशि इन नगर निगमों में खर्च की जाती है। कोसी एकमात्र ऐसी कमिश्नरी है, जिसके सहरसा, सुपौल और मधेपुरा तीनों जिलों में एक भी शहर नगर निगम की श्रेणी में नहीं हैं।

19 अनुमंडल मुख्यालय, जहां ग्राम सभा है

पटना जिला में पालीगंज, नालंदा जिला में हिलसा, रोहतास में बिक्रमगंज, गया में नीमचक बथानी, नवादा में रजौली, गोपालगंज में हथुआ, मुजफ्फरपुर में मुजफ्फरपुर पश्चिमी, सीतामढ़ी में पुपरी, पूर्वी चंपारण में सिकरहना, दरभंगा में बिरौल, मधुबनी में बेनीपट्‌टी और फुलपरास, पूर्णिया में वायसी और धमदाहा, समस्तीपुर में पटोरी, सुपौल में त्रिवेणीगंज, मधेपुरा में उदाकिशुनगंज, मुंगेर में तारापुर और बेगूसराय जिले में मंझौली।

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