पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

‘लोग कहते हैं राजनीति कीचड़ है, इसे साफ करने किसी को आगे आना होगा’

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष

राजकुमारी देवी, जिन्होंने जय जवान की तरह ही जय किसान के नारे काे सार्थक किया

यूं तो खेती-किसानी पुरुषों के लिए उपयुक्त माना जाता है, लेकिन सरैया की किसान चाची ने इसे झुठला कर मिसाल कायम कर दी। किसान चाची के नाम से मशहूर राजकुमारी देवी आज महिला ही नहीं बल्कि पुरुषों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। नई तकनीक की ट्रेनिंग लेकर वे खेती को घाटे के सौदा के बजाय मुनाफे में तब्दील कर रही हैं। उनकी उपलब्धियों के कारण ही भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा है। इससे पहले वे मुख्यमंत्री के हाथों से पुरस्कृत हो चुकी हैं। इतना ही नहीं वे कौन बनेगा करोड़पति के हॉट सीट पर भई पहुंच चुकी हैं। पहले गांव में पहचानी वाली चाची अब इंटरनेशनल ब्रांड बन गई। राजकुमारी देवी ने बताया कि महिलाओं के विकास के लिए यह जरूरी है कि वे खुद पर विश्वास रखें और प्रयास को कभी नहीं छोड़ें। चाहे कोई भी क्षेत्र हो उसमें अपनी मेहनत से मुकाम हासिल किया जा सकता हैै।

राज्य स्तरीय कुश्ती में जीता गोल्ड, अब ओलंपिक में देश का झंडा लहराना चाहती है वैष्णवी

एमएलए वंदना शर्मा।

महिला रेसलर वैष्णवी।

शहर की बेला की रहने वाले रेसलर वैष्णवी भले ही नौंवी कक्षा में पढ़ती है लेकिन उसके हौसले किसी पेशेवर खिलाड़ी से कम नहीं हैं। राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में पूरे राज्य के महिला पहलवानों को चित कर गोल्ड मेडल जीतने वाली वैष्णवी कुश्ती के क्षेत्र में नई सनसनी बनकर उभरी है। वह स्कूली छात्राओं व महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। अब अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश का झंडा लहराना चाहती है। नेशनल में भी वह बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। वैष्णवी ने बताया कि उसके मामा रंजीत कुमार साह उसे कुश्ती के दांव-पेंच सिखाते हैं। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ वह रोज-रोज सुबह-शाम 1-1 घंटा अखाड़ा में अभ्यास करती हैं। महिलाओं का हौसला बढ़ाने के लिए वह कहती हैं कि लड़कियां किसी भी क्षेत्र में आज लड़कों से पीछे नहीं हैं। ऐसे में अपनी मंजिल को पाने के लिए सही दिशा में मेहनत करने की जरूरत है। मुकाम हासिल करने के बाद आलोचक भी प्रशंसक बन जाते हैं।

पद्मश्री राजकुमारी देवी उर्फ किसान चाची।

मुजफ्फरपुर | बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि राजनीति कीचड़ है। उसमें महिलाओं को नहीं जाना चाहिए। लेकिन, अगर वाकई ऐसा है तो किसी को तो साफ करने आगे आना होगा। दिल्ली के शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुईं अाैर पारू प्रखंड के छाप की बेटी वंदना शर्मा मानती हैं कि महिलाओं को घर की तरह ही समाज को सजाने की जरूरत है। आज तक समाज ने महिलाओं को जो भी जिम्मेदारी दी है उसे बखूबी महिलाओं ने निभाया है। लेकिन, समाज के कुछ ताकतवर लोग महिलाओं को निर्णायक की भूमिका में नहीं देखना चाहते हैं। मौजूदा दौर में महिलाओं को अपना स्थान सुनिश्चित करने के लिए हर कदम पर चुनौती मिलेगी। इसे स्वीकार कर इससे पार पाने के बाद ही वे आगे बढ़ सकती हैं। यह सफलता का मूलमंत्र है। खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाली महिलाओं के लिए। वंदना शर्मा ने कहा कि अन्ना आंदोलन में उन्होंने आगे बढ़कर हिस्सा लिया। इससे पहले वे महिलाओं व छात्राओं की शिक्षा के लिए कार्य कर रही थी। कभी नहीं सोचा था कि राजनीति में आऊंगी। लेकिन जब मौका मिला तो आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
खबरें और भी हैं...