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‘झूमना है ताे बिना नशे में झूमें’

एक वर्ष पहले
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मुजफ्फरपुर|झूमना है ताे बिना नशे के झूमाे, नशे में ताे हर काेई झूमता है...,जैसे ही इस पंक्ति काे कवि विवेक ने सुनाया पूरी महफिल ठहाकाेंे से गूंज उठी। वहीं, अमीर हमजा ने अाते हाे ससुराल में मिस काॅल की तरह..., सुना कर तालियां बटाेरी ताे शायर पंकज कर्ण ने खामाेश है हर शख्स, मगर चीख बहुत है...,सुनाया। माैका था रेलवे मनाेरंजन प्रेक्षा गृह में राष्ट्रीय कवि संगम की अाेर से अायाेजित हास्य कवि सम्मेलन सह हाेली मिलन समाराेह का।
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