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भास्कर एक्सपोज : मुजफ्फरपुर के हवा में जहर, फेफड़ों में आ रही है सिकुड़न

लोगों में सांस की बीमारी बढ़ गई है। टीबी के मरीजों में अप्रत्याशित वृद्धि रिकाॅर्ड की गई है।

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 04:55 AM IST
{नारायणपुर अनंत में मालगाड़ी से क्लिंकर अनलोड कर लीची बागान में जमा करते मजदूर। {नारायणपुर अनंत में मालगाड़ी से क्लिंकर अनलोड कर लीची बागान में जमा करते मजदूर।

मुजफ्फरपुर. रक्सौल से बीमारी की जड़ क्लिंकर की ढुलाई मुजफ्फरपुर के नारायणपुर अनंत में शिफ्ट कर दी गई। क्लिंकर लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। क्लिंकर के रूप में मीठे जहर की अनलोडिंग-लोडिंग और इसके खतरनाक पहलुओं की दैनिक भास्कर ने पड़ताल की। भास्कर के 5 रिपोर्टरों ने 20 दिनों तक क्लिंकर की ढुलाई में लगे मजदूरों, आसपास के लोगों और शहर के वार्ड नंबर 49, 33 और 32 के लोगों के साथ ही शेरपुर, मिठनपुरा लाला, दिघरा रामपुर, बेला छपरा और घिरनपट्‌टी के लोगों की पीड़ा का जायजा लिया। चिकित्सकों से बातचीत की। पढ़िए जानलेवा सच बताती रिपोर्ट।

नेपाल की सीमेंट कंपनियों के लिए नारायणपुर अनंत मालगोदाम वरदान साबित हो रहा है। लेकिन, सीमेंट के कच्चा माल क्लिंकर की यहां से ढुलाई कर रेलवे मुजफ्फरपुर के शहरी लोगों के साथ ही ग्रामीणों को भी बीमार करने लगा है। बढ़े प्रदूषण और बीमारियों को लेकर रक्सौल में क्लिंकर ढुलाई के खिलाफ भारी विरोध हुआ। बड़े आंदोलन के बाद रेलवे ने वहां से ढुलाई का काम शहर से सटे नारायणपुर अनंत मालगोदाम में शिफ्ट कर दिया। इससे नारायणपुर अनंत से सटे शहर के पॉश इलाके मिठनपुरा, बेला, दिघरा रामपुर साह, शेरपुर, लक्ष्मीनारायण कॉलोनी और मिठनपुरा लाला जैसे इलाकों के सैकड़ों शहरी लोगों में सांस व फेफड़े से संबंधित शिकायतें बढ़ने लगी हैं। आंखों से जुड़ीं परेशानियां भी बढ़ी हैं। क्लिंकर ढुलाई शुरू होने के बाद टीबी मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। अभी इन इलाकों में 200 से अधिक लोग बीमार हैं। शहर के पूर्वी इलाके की करीब 2 लाख की आबादी प्रदूषण की चपेट में है। रेलवे के मंडल व जोनल स्तर के अधिकारी मंत्रालय के आदेश का हवाला देकर हाथ खड़े कर दे रहे हैं। परेशान लोग इस क्लिंकर को काला जहर करार दे चुके हैं। क्लिंकर का धूलकण मीठे जहर के समान होता है। हवा के साथ इसकी गर्द मनुष्य के शरीर में जाती है। इससे पेट की बीमारी, गिल्टी और पथरी जैसी गंभीर बीमारियां भी होती हैं।

क्लिंकर से 2 बड़ी समस्याएं

काले जहर की चपेट में शहर का पूर्वी इलाका और ग्रामीण क्षेत्र भी

शहर के पूर्वी इलाके के दो लाख से अधिक लोग क्लिंकर रूपी जहर की चपेट में आ गए हैं। नारायणपुर अनंत मालगोदाम में आ रही सीमेंट और स्टोन चिप्स के धूलकण से यहां के लोग परेशान थे। अब डेढ़ माह से क्लिंकर की ढुलाई के कारण लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। शहर के इस पूर्वी इलाके और उससे सटे ग्रामीण क्षेत्र के लोग कई गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए हैं।

डेढ़ माह में ही बढ़ गए टीबी के 20 मरीज, कई को हुई एलर्जी

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक डेढ़ माह में ही 20 से अधिक रोगी टीबी से ग्रसित पाए गए हैं। जनवरी माह तक इस इलाके में महज 10 मरीज टीबी के थे। वहीं फरवरी माह के अंत तक 30 मरीज टीबी से ग्रसित हो गए हैं। नारायणपुर अनंत मालगोदाम के बाहर दिघरा रामपुरा गांव में लीची बाग में क्लिंकर लोडिंग होती है। लीची बाग से सटे करीब 200 घरों में हर कोई बीमार है। अजय कुमार, बैद्यनाथ दास और रंजीत दास टीबी रोग से ग्रसित हो गए हैं। शिवजी दास, मोहन दास, पुष्पा देवी, मछिया देवी और मनोहर कुमार सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। दर्जनों लोगों को अलर्जी है।

डॉक्टरों ने दी कैंसर तक होने की चेतावनी

आईडीएसपी के स्टेट माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर नवीन दत्ता बताते हैं कि क्लिंकर और सीमेंट के डस्ट से लंग्स का फंक्शन प्रभावित होता है। इससे क्रॉनिकल ऑब्सट्रक्टिव लंग्स जैसी बीमारियां, पेनिमोकोनिओसिस और कार्सिनोमा नामक बीमारी से लंग्स और लीवर डैमेज होता है। लंबे समय तक इस तरह डस्ट के बीच रहने और इलाज न कराने से कैंसर तक हो जाता है।

फिजीशियन डॉक्टर एके दास बताते हैं कि क्लिंकर का धूलकण सांस के रास्ते फेफड़े में जाता है। पहले इससे अलर्जी होती है। फिर रिएक्शन से फेफड़े में सिकुड़न होने लगती है। यह काला जहर के रूप में मानव शरीर को प्रभावित करता है। इससे मौत तक हो जाती है। मिठनपुरा इलाके से प्रतिदिन दस से अधिक मरीज इस बीमारी से पीड़ित होकर इलाज के लिए आ रहे हैं।

और यह तो हम जानते ही नहीं

आपके घरों में इतनी अधिक धूल क्यों जमा हो रही : शहर के बेला, मिठनपुरा, पीएनटी मार्ग, शेरपुर व दिघरा रामपुर के लोगों के घरों में पिछले डेढ़ माह से धूल की परत अधिक मोटी हो रही थी। लोगों के समझ में यह नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? जब से उन्हें क्लिंकर ढुलाई की जानकारी मिली है, तब से इन कॉलोनियों के लोग भी परेशान हैं।

इसीलिए वायु प्रदूषण की सबसे गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है अपना मुजफ्फरपुर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वायु प्रदूषण पर हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों में मुजफ्फरपुर की स्थिति काफी गंभीर बताई गई है। बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, मुजफ्फरपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 409 दर्शाया गया है। जबकि, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 362 बताया गया है। जनवरी-फरवरी में वायु प्रदूषण के स्तर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली छठे स्थान पर थी, जबकि मुजफ्फरपुर और उत्तर प्रदेश के वाराणसी जैसे शहरों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। 24 शहरों में प्रदूषण के स्तर की तुलना वायु गुणवत्ता सूचकांक के आधार की गई है। दिसंबर में मुजफ्फरपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 और पटना का 373 था।

भास्कर हस्तक्षेप : कुमार भवानंद

जनप्रतिनिधि खामोश प्रशासन की आंखें बंद

शहर की घनी आबादी के बीच पिछले डेढ़ महीने से जिस तरह सीमेंट निर्माण में प्रयुक्त होने वाली क्लिंकर की लोडिंग और अनलोडिंग हो रही है, उसके गंभीर परिणाम अभी से दिखने लगे हैं। आसपास रहने वाले लोगों में सांस की बीमारी बढ़ गई है। टीबी के मरीजों में अप्रत्याशित वृद्धि रिकाॅर्ड की गई है। प्रथमदृष्टया वही सारी बातें सामने आ रही हैं, जिससे रक्सौल के लोग लंबे समय तक जूझते रहे थे। भारी विरोध और आंदोलन के आगे रेलवे ने रक्सौल की जगह मुजफ्फरपुर को डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया। अमानक तरीके से गूड्स ट्रेन से उतारी जाने वाली क्लिंकर से उठने वाली धूल के गुबार ने यहां के लोगों को परेशानी में डाल दिया है। प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ा है। इस दायरे में रहने वाली दो लाख की आबादी की सेहत बुरी तरह से प्रभावित होने लगी है। सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि इस इलाके में टीबी के मरीजों की संख्या में 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आसपास प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सक भी यह स्वीकार करने से नहीं हिचकते कि इन दिनों सांस से संबंधित रोगों के मरीजों की संख्या उनके यहां बढ़ गई है। अचानक सेहत पर हुए इस हमले के कारणों की जानकारी या तो यहां के जनप्रतिनिधियों-हुक्मरानों को है नहीं या फिर किन्हीं वजहों से वे चुप्पी साध कर बैठे हैं। गौर करने लायक बात तो यह भी है कि रक्सौल में प्रदूषण विभाग ने ऐसे ही हालातों के बाद क्लिंकर की लोडिंग-अनलोडिंग से होने वाले प्रदूषण से बचाव के लिए गाइडलाइन जारी की थी। यहां इस गाइडलाइन पर तो मानो धूल की परत बिछा दी गई है, यानी उस पर अमल ही नहीं किया जा रहा है। कृषि विशेषज्ञ तो यह भी कहने लगे हैं कि आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो शाही लीची के बाग उजड़ जाएंगे। यानी, नेपाल के सीमेंट उद्योग को फलने-फूलने के लिए यहां से क्लिंकर भेज कर हम अपनी बर्बादी की बुनियाद रख चुके हैं। हमारी सेहत, शाही लीची और सब्जियों का हमसे रूठ जाना तय है।

Bhaskar Expose on Muzaffarpur Air Pollution
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नारायणपुर अनंत यार्ड से करीब एक किलोमीटर दूर दिघरा रामपुर में मरीज रंजीत दास। यहीं लीची बागान में ट्रकों पर लोड होती है क्लिंकर। नारायणपुर अनंत यार्ड से करीब एक किलोमीटर दूर दिघरा रामपुर में मरीज रंजीत दास। यहीं लीची बागान में ट्रकों पर लोड होती है क्लिंकर।
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{नारायणपुर अनंत में मालगाड़ी से क्लिंकर अनलोड कर लीची बागान में जमा करते मजदूर।{नारायणपुर अनंत में मालगाड़ी से क्लिंकर अनलोड कर लीची बागान में जमा करते मजदूर।
Bhaskar Expose on Muzaffarpur Air Pollution
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नारायणपुर अनंत यार्ड से करीब एक किलोमीटर दूर दिघरा रामपुर में मरीज रंजीत दास। यहीं लीची बागान में ट्रकों पर लोड होती है क्लिंकर।नारायणपुर अनंत यार्ड से करीब एक किलोमीटर दूर दिघरा रामपुर में मरीज रंजीत दास। यहीं लीची बागान में ट्रकों पर लोड होती है क्लिंकर।
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