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एईएस से मिलते लक्षण वाले बच्चे की हुई मौत, पीएचसी में बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं

एसकेएमसीएच में एईएस से मिलते-जुलते लक्षण वाले चार बच्चे भर्ती हैं।

Danik Bhaskar | Mar 29, 2018, 05:55 AM IST
मार्च के अंतिम सप्ताह में ही दो बच्चों में एईएस की पुष्टि होने से स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ व डब्लूएचओ में हड़कंप मच गया है। मार्च के अंतिम सप्ताह में ही दो बच्चों में एईएस की पुष्टि होने से स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ व डब्लूएचओ में हड़कंप मच गया है।

मुजफ्फरपुर. एसकेएमसीएच में भर्ती दो बच्चों में बुधवार को जांच के बाद इंसेफेलाइटिस (एईएस) की पुष्टि हुई। वहीं, इससे मिलते-जुलते लक्षण वाले एक बच्चे की मौत हो गई। एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजमोहन ने सरकार को इसकी रिपोर्ट भेज दी है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर-नवंबर 2017 व फरवरी 2018 में भी एईएस पीड़ित एक-एक बच्चे भर्ती हुए थे। एसकेएमसीएच में एईएस से मिलते-जुलते लक्षण वाले चार बच्चे भर्ती हैं। इनमें पीआईसीयू में भर्ती सीतामढ़ी के सुरसंड की नंदनी कुमारी और कटहां मेहसी की सोनम कुमारी में एईएस की पुष्टि की गई है।

वहीं पूर्वी चंपारण के बंजरिया के खैरा गांव निवासी मुकेश मांझी के दो वर्षीय पुत्र आकाश कुमार को मंगलवार शाम में भर्ती कराया गया। आकाश तेज बुखार व चमकी से पीड़ित था। बुधवार सुबह उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने उसमें हर्पिस नामक बीमारी बताई है। यह बीमारी भी इंसेफेलाइटिस से संबंधित है।

पीएचसी में बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं
इधर, मार्च के अंतिम सप्ताह में ही दो बच्चों में एईएस की पुष्टि होने से स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ व डब्लूएचओ में हड़कंप मच गया है। तीनों विभाग ने इस बीमारी से बचाव की रणनीति बनाने के लिए बुधवार को आपात बैठक की। बैठक में दो दिनों के अंदर पीएचसी से लेकर जिलास्तर तक के अस्पतालों में कमियों को पूरा करने का निर्णय लिया गया। माड़ीपुर स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में डब्लूएचओ व यूनिसेफ के प्रतिनिधियों ने कहा कि पीएचसी में बीमारी से बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। कई जगह बेड, ग्लूकोमीटर, स्ट्रिप व अन्य आवश्यक संसाधन नहीं है। बैठक में बीमारी से बचाव के लिए प्राथमिक स्तर पर इलाज सबसे आवश्यक है।