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8 साल पहले बाढ़ में बहा था स्कूल, अब नदी पार कर पढ़ने जाते हैं 200 से अधिक बच्चे

200 से अधिक बच्चे बूढ़ी गंडक नदी पार कर पढ़ने के लिए 10 किमी दूर जाते हैं।

Danik Bhaskar | Mar 15, 2018, 02:40 AM IST

मुजफ्फरपुर. 8 वर्ष पूर्व आई बाढ़ ने बच्चों की परेशानी काफी बढ़ा दी। ये जान जोखिम में डाल कर स्कूल जा रहे हैं। बोचहां प्रखंड के आर्थर दक्षिणी टोला स्थित एकमात्र प्राथमिक स्कूल का भवन 2009 की बाढ़ में ध्वस्त हो गया था। बच्चों को आर्थर वंशमन मध्य विद्यालय, दरघा प्राथमिक विद्यालय व द्वारिका नगर हाईस्कूल भेजा जाने लगा। तब से 200 से अधिक बच्चे बूढ़ी गंडक नदी पार कर पढ़ने के लिए 10 किमी दूर जाते हैं।

जलस्तर कम होने पर बीच नदी में जाकर नाव पकड़नी पड़ती है। कई बच्चों के परिजन नाव तक पहुंचा भी देते हैं, लेकिन अधिकतर अकेले ही आते-जाते हैं। इनके स्कूल से घर लौटने तक परिजन विभिन्न आशंकाओं से डरे-सहमे रहते हैं। वे कहते हैं- छात्राओं के लिए तो और समस्या है। रास्ते में उचक्के परेशान करते हैं। एक छात्रा से जबरदस्ती का प्रयास भी हुअा था, तब से कई ने स्कूल जाना छोड़ दिया। पंकज ठाकुर समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि गांव की आबादी करीब 4 हजार है। कई बार मुशहरी सीओ को आवेदन देकर गांव में ही स्कूल की व्यवस्था कराने का आग्रह किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

जान जोखिम में डाल ऐसे कटता है घर से स्कूल तक का सफर

- पॉलीथिन में कपड़े लेकर उसे सिर पर रख घर से निकलते हैं बच्चे
- नदी में घुटने भर पानी के बीच जाकर पांव-पैदल ही प्रतिदिन आते-जाते हैं
- वहां से ओवरलोड नाव पर सवार होकर बच्चे नदी को पार करते हैं
- अभी जलस्तर कम होने से बीच नदी में पकड़ते हैं नाव
- शाम को इसी तरह की परेशानी झेलते हुए स्कूल से लौटते हैं घर
- इनके घर लौटने तक संशयों से घिरे रहते हैं परिजन
- रास्ते में छात्राओं को उचक्के भी करते परेशान
- भयवश कई ने तो स्कूल जाना भी छोड़ दिया है
- बार-बार आग्रह पर भी गांव में नहीं बन पाया स्कूल

फोटो व कंटेंट : तुषार राय