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यहां बिना पोस्ट 49 से रिश्वत लेकर दी नौकरी, सैलरी नहीं मिली तो हुआ खुलासा

इस फर्जीवाड़े में जिला मुख्यालय तक के अफसरों की मिलीभगत सामने आ रही है।

Dainik Bhaskar

Jan 28, 2018, 04:40 AM IST
Recruitment in health department by Fraudulently

मुजफ्फरपुर. यहां के साहेबगंज पीएचसी में बिना पद सृजन के 49 लोगों की फर्जी बहाली करने का खुलासा हुआ है। पीएचसी के अंतर्गत एपीएचसी और सब सेंटरों पर नाइट गार्ड और सफाईकर्मी की बहाली के लिए नियुक्ति आदेश पत्र बनाया गया। फिर तत्कालीन पीएचसी प्रभारी पांडेय आलोक कृष्ण सहाय और डॉ. उपेंद्र प्रसाद से तालमेल कर सभी की बहाली कर दी गई। इसके लिए 50 हजार से एक लाख रु. तक की रिश्वत ली गई। बहाली 2014-15 में हुई।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

सैलरी का भुगतान डाटा ऑपरेटर सह प्रबंधक रोहित कुमार ने अपने निजी खाते का चेक देकर किया। हालांकि बाउंस होने पर चेक वापस भी ले लिए। जब दो पीड़ितों ने बकाए वेतन के लिए लोक शिकायत निवारण कार्यालय में शिकायत की तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचने पर 25 जनवरी को मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच का आदेश दिया है। अब सभी को हटा दिया गया है। इस फर्जीवाड़े में जिला मुख्यालय तक के अफसरों की मिलीभगत सामने आ रही है।

शिकायत निवारण अधिकारी ने सीएस को जांच का दिया आदेश


एपीएचसी राजेपुर में तैनात राणा विवेकानंद और माधोपुर हजारी एपीएचसी में तैनात किए गए जगदीश राम ने लोक शिकायत निवारण कार्यालय में बकाए वेतन के लिए गुहार लगाई। इस पर पूरे मामले की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। इसके बाद सिविल सर्जन ने साहेबगंज पीएचसी प्रभारी व डाटा ऑपरेटर सह प्रबंधक से जवाब मांगा। इसमें प्रबंधक ने कहा कि वे मामले के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने पर लोक शिकायत निवारण अधिकारी ने सिविल सर्जन को कमेटी गठित कर जांच कराने का निर्देश दिया।

पीड़ितों ने भास्कर को बताई घोटाले की कहानी

पीड़ित राणा विवेकानंद ने बताया कि 14 फरवरी 2014 को राजेपुर एपीएचसी में गार्ड व ऑफिस पियून के पद पर तैनात किया गया। स्वास्थ्य प्रबंधक रोहित कुमार ने 5 हजार रुपए प्रति माह पर बहाली की। मानदेय के बदले प्रबंधक ने 20900 रुपए का निजी चेक दिया। वह बाउंस कर गया। दो साल तक काम करने के बाद हटा दिया गया। इसके बाद केस दर्ज कराया। बहाली के बदले 50 हजार रिश्वत ली गई।

पीड़ित जगदीश राम ने बताया कि माधोपुर हजारी में नाइट गार्ड के रूप में बहाल किया गया। 20 हजार रु. घूस ली गई। 4 साल तक हाजिरी बनाता रहा। जब वेतन मांगने जाता तो टाल दिया जाता था। 7 नवंबर 2017 को लोक शिकायत कार्यालय में वेतन के लिए गुहार लगाई।

सिविल सर्जन डॉक्टर ललिता सिंह ने बताया कि एसीएमओ डॉ. सुधा श्रीवास्तव, डॉ. हरेंद्र कुमार आलोक व डॉ. चंद्रशेखर प्रसाद के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।

तत्कालीन पीएचसी प्रभारी डॉक्टर पांडेय आलोक कृष्ण सहाय ने बताया कि पीएचसी के कुछ कर्मियों ने मुझे गुमराह कर दस्तखत करा लिए। मुझे बहाली करने का पावर भी नहीं था।

पूर्व स्वास्थ्य प्रबंधक रोहित कुमार ने बताया कि राणा विवेकानंद की मां से 20 हजार रु. उधार लिया था। उसी के बदले चेक दिया था। चेक बाउंस होने पर नकद दे दिए। बहाली के बारे में जानकारी नहीं है।

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