मुजफ्फरपुर

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मवेशियों के पेट में बढ़ रही गैस, सरैया में दो दर्जन गायों की मौत, विभाग ने किया अलर्ट

पशुपालन विभाग की ओर से इस बीमारी की रोकथाम के लिए कोई खास उपाय नहीं किया गया है।

Danik Bhaskar

Mar 27, 2018, 04:34 AM IST

सरैया. गंडक नदी के किनारे बसे गांवों में एक सप्ताह के अंदर अफरा रोग से दो दर्जन गायों की मौत हो चुकी है। इससे पशुपालकों में दहशत व्याप्त है। मरने वाली गायों में विदेशी नस्ल के साथ देसी नस्ल की गाय भी शामिल है। जानकारी के बावजूद पशुपालन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है। जिला पशुपालन अधिकारी डॉ. मनोज कुमार के निर्देश के बावजूद प्रखंड पशुपालन विभाग की ओर से इस बीमारी की रोकथाम के लिए कोई खास उपाय नहीं किया गया है। लोग ग्रामीण पशु चिकित्सकों के भरोसे गायों का इलाज करा रहे हैं।

रेवा बसंतपुर दक्षिणी पंचायत के पूर्व मुखिया गणीनाथ सहनी, दातापुर पचभिरवा पंचायत के मुखिया चिदानंद द्विवेदी व पूर्व मुखिया अजय सिंह के साथ कई पशुपालकों ने बताया कि सबसे पहले गाय को बुखार आने के बाद शरीर में सूजन होने लगता है। जब तक ग्रामीण पशु चिकित्सक इलाज करते हैं, तब तक 2 से 4 घंटे के अंदर गायों की मौत हो जा रही है।

इन गांवों में फैली बीमारी

अब तक प्रखंड के दातापुर, पचभिरवा, रेवा, बसंतपुर, सहिला पट्टी, अयोधपुर, डीही सहित अन्य गांवों में इस बीमारी का प्रकोप है। मरने वाली गायों की कीमत पशुपालक 25 से 80 हजार रुपए बता रहे हैं। उनका कहना है कि इस बीमारी की रोकथाम नहीं की गई तो यह अन्य गांवों में भी फैल सकती है।

बदलते मौसम के साथ-साथ प्रदूषित पानी और कीड़े मुख्य वजह
पशुपालन विभाग ने बदलते मौसम के साथ-साथ प्रदूषित पानी व कीड़ा को प्रमुख कारण माना है। बताया गया है कि गाय के पेट में गैस बनने के बाद टीनटाइटिस डेवलप होने लगता है। पीड़ित गाय को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इससे बुखार के साथ शरीर में सूजन आ जाता है।

पशुपालकों को सलाह : जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि गाय में अफरा रोग का लक्षण दिखते ही उसे तत्काल गैस की दवा के साथ-साथ अधिक से अधिक पानी पीने को दें।

इनका है कहना

जिला पशुपालन अधिकारी डॉक्टर मनोज कुमार का कहना है कि कुछ गाय में अफरा रोग फैलने की शिकायत आई है। प्रखंड पशु चिकित्सा अधिकारी को प्रभावित गांव में भेजा गया था। यदि दो दर्जन से अधिक गाय की मौत हुई है तो विभाग की टीम प्रभावित गांव का दौरा कर उचित इलाज की व्यवस्था करेगी। पशुपालकों को मिनरल मिक्चर के साथ-साथ कीड़ा की दवा उपलब्ध कराई जाएगी।

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