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सिपाही आशीष ने कहा- सर्जेंट मेजर, कोत प्रभारी व जमादार करते थे गोलियों का धंधा

गायब गोली को वापस लाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन कर खड़ी हो गई है।

Danik Bhaskar | Jul 03, 2018, 03:51 PM IST

समस्तीपुर. जिला पुलिस के शस्त्रागार से 4056 से अधिक गोली गायब होने के मामले में जांच कमेटी के सामने सिपाही आशीष आनंद का यह बयान कि सर्जेंट मेजर मिथिलेश कुमार सिंह, कोत प्रभारी राजेंद्र गिरि व जमादार उमाशंकर सिंह मिलीभगत कर अपराधियों के हाथों गोदाम से गोली बेचने का कारोबार करते थे। आशीष आनंद के इस बयान से पुलिस महकमा में हड़कंप मच गया है। पुलिस मुख्यालय ने पूरे मामले पर एसपी से रिपोर्ट तलब की है।

इधर, गायब गोली को वापस लाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन कर खड़ी हो गई है। बताया जाता है कि सर्जेंट मेजर 21 जनवरी, 2013 से यहां पदस्थापित हैं। इन पांच साल के दौरान उनके द्वारा एक बार भी शस्त्रागार के कोत का भौतिक सत्यापन नहीं किया गया। जबकि सार्जेंट मेजर के अधीन पुलिस केंद्र के बल का नियंत्रण के अलावा कोत के रख-रखाव की जिम्मेदारी होती है।

उधर, इस मामले में प्राथमिकी के बाद पुलिस केंद्र के पदाधिकारी मुफस्सिल थाने की ओर देख रहे हैं। पुलिस लाइन में इस मामले पर कोई कुछ बोलने से परहेज कर रहे हैं। एसपी दीपक रंजन ने कहा कि इस मामले में जिसके खिलाफ साक्ष्य होगा, वह बचने वाला नहीं है। प्राथमिकी के बाद पूरे मामले की जांच चल रही है।

पीटीसी हजारीबाग को दी गई थी 400 गोलियां रजिस्टर पर दर्ज है 800
बताया जाता है कि जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि गड़बड़ी को ढंकने के लिए शस्त्रागार में तैनात लोगों ने सब खेल किया है। वर्ष 1999 में पीटीसी पदमा हजारीबाग को 400 रायफल की गोली निर्गत की गई थी। इसे बाद में शस्त्रागार के बीएफ पंजी पर जून 2016 से चार सौ गोलियों के बदले 800 निर्गत गोलियां दिखाई जा रही है।