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छठ की आस्था ऐसी कि दरक जातीं हैं मजहब की दीवारें

रि विलगंज की 80 वर्षीय जैबून 20 वर्षों से पूरे विधान से छठ कर रही हैं। कहती हैं जब तक जिंदगी रहेगी छठ करते रहेंगे। छठी...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 04:11 AM IST
Orai - chhath39s faith is such that the people of the caste
रि विलगंज की 80 वर्षीय जैबून 20 वर्षों से पूरे विधान से छठ कर रही हैं। कहती हैं जब तक जिंदगी रहेगी छठ करते रहेंगे। छठी मैया ने नया जीवन दिया है। बहुत दिन पहले तबीयत खराब हो गई थी। चलने में भी दिक्कत होने लगी। लोगों ने बताया कि छठी मैया से अर्ज करो ठीक हो जाओगी। मैंने ऐसा ही किया। स्वास्थ्य सुधरने लगा। मैं ठीक हो गई। कार्तिक और चैत दोनों छठ करती हूं। सास बूलाकन भी छठ पर्व तथा जीवितपुत्रिका व्रत करती थीं। जैबून की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं है। छोटे-मोटे सब्जी व्यवसाय से जुड़ी है लेकिन धूम-धाम से महापर्व मनाती हैं। पिछले साल सरयू नदी स्थित नाथ बाबा मंदिर घाट पर अर्घ्य देने गई थीं।

मंिदर की सफाई भर से दूर हुआ दाग

भोजपुर जिले में रामसागर गांव में कई दशक से हिन्दू-मुस्लिम एक साथ छठ व्रत करते हैं। गांव में 1967 में गांगी नदी के तट पर सूर्यमंदिर बना। छठ का अायोजन दोनों समुदाय के जिम्मे है। अलीराज मियां नेे बताया कि रोज मंदिर की साफ सफाई करता था। सफेद दाग से पीड़ित था। दाग से मुक्ति के लिए छठ मन्नत मांगी। मेरा सफेद दाग ठीक हो गया। 20 वर्ष से छठ करता हूं।

व्रत से बेबी का परिवार हुआ खुशहाल

सिवान के बसंतपुर में म्यूजिकल ग्रुप चलाने वाले अच्छे मियां की प|ी बेबी बेगम बेटे को रोगमुक्त करने की कामना के साथ 8 वर्षों से छठ कर रही है। बेबी ने बताया कि व्रत का सुखद फल भी मिला। बेटे की बीमारी नियंत्रित है अपना घर भी बन गया। बसंतपुर की ही शकीना ने बेटे के लिए छठ व्रत किया। बेटा हुआ तो उसके हाथों भिक्षाटन करा व्रत को पूरा किया।

खुशबू बीवी के छठ व्रत में शामिल हो जाता है पूरा गांव

बि क्रमगंज अनुमंडल के औराई गांव के खुशबू बीवी का जुनून ऐसा की भीख मांगकर छठ पूजा से संबधित सामान खरीदती है। ग्रामीण, सहयोग के तौर पर कुछ आर्थिक मदद करते हैं। खुशबू कहती हैं कि 25 साल पहले मैं ससुराल आई। मेरी सास छठ करती थी। अब मैं करती हूं। पर्व से मुझे शांति और सुकून मिलता है। मेरे घर मे कब से यह पर्व होता है यह कोई नही बता पाता है। हमें हर समुदाय के लोगों से स्नेह मिलता है। गांव के ही बीरेंद्र सिंह, मिथलेश सिंह, बिपिन सिंह, समाजिक कार्यकर्ता जनार्दन सिंह कहते है कि मुस्लिम समुदाय का यह दर्जी परिवार दशकों से भगवान भास्कर को अर्घ्य देता है।

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