7 पंचायतों का फैसला / बच्चा चोर की अफवाह में निर्दोषों काे मारने और पीटने वालों का सामाजिक बहिष्कार होगा



Dainik Bhaskar started non-violent campaign against violence in collaboration with Gram Panchayats
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Dainik Bhaskar started non-violent campaign against violence in collaboration with Gram Panchayats

  • बेकसूर लोगों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए दैनिक भास्कर ने ग्राम पंचायतों के सहयोग से शुरू किया हिंसा के खिलाफ अहिंसात्मक अभियान
  • इस भीड़ का चेहरा भी है और मकसद भी अहिंसा के रास्ते चलकर बचाएगी बेकसूर जिंदगियां, बापू के तीन सिद्धांतों पर चलेगी ये भीड़ न बुरा सुनेगी-न बुरा देखेगी-न बुरा बोलेगी 

Dainik Bhaskar

Oct 02, 2019, 05:14 AM IST

मुजफ्फरपुर. ये तस्वीर सीतामढ़ी के डुमरा प्रखंड की रामपुर परोरी पंचायत और बथनाहा की पंथपाकर पंचायत की है...। यहां पंचों और लोगों ने भीड़ की हिंसा की घटनाओं को राेकने के लिए यह फैसला लिया है कि अब बच्चा चोर की अफवाह में किसी निर्दोष काे मारा-पीटा तो उन सभी लोगों का सामाजिक बहिष्कार होगा। ऐसे ही फैसले बेतिया, मोतिहारी, दरभंगा और मधुबनी में भी हुई सात पंचायतों में लिए गए हैं। 


ये फैसले दैनिक भास्कर और गांवों की पंचायतों के अहिंसा अभियान के तहत लिए जा रहे हैं, जिसकी शुरुआत आज गांधी जयंती से हुई है। उद्देश्य, गांव-गांव में लोगों जोड़कर एक ऐसी भीड़ खड़ी करना है, जिसका चेहरा भी है और मकसद भी। ये भीड़ समझदार है और अब अहिंसा के रास्ते पर चलकर बेकसूर जिंदगियां बचाएगी। न बुरा सुनेगी-न बुरा देखेगी-न बुरा बोलेगी। शुरुआत छोटी ही सही, पर एक जिंदगी भी बचा पाए तो बड़ा पुण्य होगा।


क्योंकि पिछले दो माह में सीतामढ़ी, दरभंगा, समस्तीपुर, बेतिया, मधुबनी और मोतिहारी में लगभग 63 घटनाएं भीड़ की हिंसा की हुई है। बेकाबू भीड़ ने दो लोगों को मौत के घाट भी उतार दिया। कुछ को इतना मारा कि वे अब भी ठीक से चल नहीं पा रहे हैं। इस हिंसा में कई बेकसूर जेल में भी बंद है, क्योंकि उनका नाम पुलिस एफआईआर में दर्ज था। जबकि वे घटना के वक्त मौजूद ही नहीं थे। अब उनके परिजन परेशान हैं। हालात ये हो गए हैं कि लोग अनजान गांवों और इलाकों में जाने में कतराने लगे हैं। उन्हें डर है कि बच्चा चोर कहकर कहीं भीड़ उनकी जान लेने पर उतारू हो जाएगी।

 

आखिर ये अफवाहें फैला कौन रहा है?

यह भीड़ बिहार की नहीं हो सकती। अफवाहों को सच मान कर जान लेने पर उतारू भीड़। अंधे फैसले लेने वाली भीड़। बिहार को ऐसी भीड़ नहीं चाहिए। अफवाहों पर भरोसा करने से बेहतर है कि पता लगाएं कि आखिर इन्हें फैला कौन रहा है। बिहार तो शांति का संदेश देने वाले बुद्ध और महावीर की धरती है। मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा बनाने वाली धरती है। यहां भीड़ अन्याय के खिलाफ उठ खड़ी होती है।

 

किसी निरीह पर हाथ उठाना तो बिहारियों के दर्शन में ही शामिल नहीं। हिंसा, किसी समस्या का समाधान नहीं। यह दूसरी समस्या जनती है। सड़कों पर अफवाहों के नाम पर जान लेने वाली भीड़ किसी की नहीं होती। अगर आज आप देखने वाली भीड़ का हिस्सा हैं। ... तो यकीन मानिए एक दिन इस भीड़ का शिकार आप भी हो सकते हैं। लोग हिंसक भीड़ का हिस्सा न बनें, इसलिए यह अभियान।

 

अब सिर्फ अफसोस ही बचा है...

केस 1: बेतिया के चौतरवा थाना क्षेत्र में 6 सितंबर को भीड़ हिंसा हुई थी। इसमें 17 नामजद व 130 अज्ञात पर एफआईआर दर्ज हुई थी। छोटक बैठा का कहना है कि वह अपनी दुकान पर कपड़ा आयरन कर रहा था। वह भीड़ में गया भी नहीं था। फिर भी उसका नाम एफआईआर में दर्ज हो गया है। बागड़ मियां दर्जी का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि वे हो -हल्ला सुनकर मौके पर चले गए थे। एफआईआर में नाम आ गया। अमरेज मियां ने बताया कि मारो मारो की आवाज आ रही थी तो वे घर पर थे। उसके काफी देर बाद वे गए। फिर भी उनका नाम एफआईआर में आ गया।

 

केस 2: शिकारपुर थाना के चानकी पिपरा गांव में 5 सितंबर को भीड़ हिंसा की घटना हुई थी। इस में 13 नामजद और पांच से छह सौ अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सात लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था। जेल गए शाहनवाज अंसारी व नेहाल अंसारी के पिता अनवारुल हक ने बताया कि जिस दिन घटना हुई उस दिन उनके दोनों पुत्र घर पर नहीं थे। घटना के एक दिन बाद पुलिस दोनों को घर से उठाकर जेल भेज दिया। जेल गए फरमान अंसारी की मां जमीला खातून ने बताया कि जिस दिन घटना हुई उस दिन वह अपने पुत्र फरमान के साथ अपनी नतीनी के इलाज में नरकटियागंज गई थी।

 

भास्कर अपील: अगर आपके इलाकों में बच्चा चोर की बातें सुनाई देती है तो पहले मामले की पुष्टि करें और कानून हाथ में न लें। अगर वाकई कोई चोर या संदिग्ध व्यक्ति पकड़ा भी जाता है तो उसे भी पुलिस के हवाले ही करें।

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