नदीम के कॅरिअर को आगे बढ़ाने के लिए बड़े भाई अशहद ने छोड़ी थी क्रिकेट, टेस्ट मैच खेल छोटे भाई ने पूरा किया सपना

Muzaffarpur News - स्पोर्ट्स रिपोर्टर | मुजफ्फरपुर बात 2003 की है। शहर के दो भाई क्रिकेट में अपना कॅरिअर तलाशने के लिए संघर्ष कर रहे...

Oct 21, 2019, 08:31 AM IST
स्पोर्ट्स रिपोर्टर | मुजफ्फरपुर

बात 2003 की है। शहर के दो भाई क्रिकेट में अपना कॅरिअर तलाशने के लिए संघर्ष कर रहे थे। परिवार के तत्कालीन हालात को देखकर दोनों का आगे बढ़ना मुश्किल था। उसी वक्त बड़े भाई अशहद इकबाल ने तय किया कि वे छोटे भाई शाहबाज नदीम के लिए अपने कॅरिअर को ब्रेक देंगे। करीब 16 वर्ष बाद वह कुर्बानी रंग लाई। शाहबाज नदीम का चयन भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम में हो गया। बेटे को पहले बल्लेबाजी फिर बाद में गेंदबाजी करते देख पिता रिटायर्ड डीएसपी जावेद महमूद की आंखें भर आई। मां हुस्न आरा भी बेटे की कामयाबी और बुलंदी की दुआ कर रही थीं। सिर्फ मां-बाप ही नहीं बल्कि पूरे शहर की आंखें रविवार की सुबह से ही टीवी स्क्रीन पर जम गई थीं। हो भी क्यों न आखिर उनके शहर का क्रिकेटर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच डेब्यू जो कर रहा था। नदीम शहर के चंदवारा स्थित बिंदेश्वरी कंपाउंड के रहने वाले हैं। वहीं बड़े भाई इकबाल दिल्ली में इंजीनियर हैं।



चंदवारा स्थित घर में टीवी पर बेटे का खेल देखते नदीम के माता-पिता।

टर्निंग ट्रैक पर तीसरे दिन नदीम को झेलना साउथ अफ्रीका के लिए आसान नहीं होगा

रांची के विकेट पर तीसरे दिन जब साउथ अफ्रीका की टीम सुबह के सत्र में खेलने उतरेगी तो उसके लिए नदीम और जडेजा को झेलना आसान नहीं होगा। पिता का कहना है कि नदीम को भारतीय पिचों पर खेलने का अच्छा खासा अनुभव है। साथ ही उसने रांची में काफी मैच खेला है ऐसे में वह टीम के लिए चैंपियन साबित हो सकते हैं।

बल्ला थामा तो नाबाद लौटे, गेंदबाजी में डाले लगातार दो मेडन ओवर

नदीम की जब बल्लेबाजी आई तो शहर के लोग उससे चौके-छक्कों की डिमांड कर रहे थे। उस वक्त भारत को तेजी से रन जुटाने थे। जल्द ही भारत की पारी घोषित कर दी गई। फिर जब गेंदबाजी की बारी आई तो नदीम ने लगातार दो ओवर मेडन फेंके। तब खराब रोशनी के कारण खेल रोक दिया गया।

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