सीतामढ़ी / बाढ़ पीड़ित इलाकों में स्कूली बच्चों की जान जोखिम में है, इन्हें बचाइए



सीतामढ़ी के परसौनी मैलवार पंचायत के वार्ड नं. 15 के बच्चे कमर भर पानी से होकर स्कूल जाते हुए। सीतामढ़ी के परसौनी मैलवार पंचायत के वार्ड नं. 15 के बच्चे कमर भर पानी से होकर स्कूल जाते हुए।
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सीतामढ़ी के परसौनी मैलवार पंचायत के वार्ड नं. 15 के बच्चे कमर भर पानी से होकर स्कूल जाते हुए।सीतामढ़ी के परसौनी मैलवार पंचायत के वार्ड नं. 15 के बच्चे कमर भर पानी से होकर स्कूल जाते हुए।

  • राज्य के 13 जिलों के 111 प्रखंडों की 1269 पंचायतों की 88,46,920 आबादी बाढ़ से प्रभावित 
  • बाढ़ पीड़ित इलाकों में स्कूली बच्चे नदी-नहर पार कर स्कूल जाने को विवश 

Dainik Bhaskar

Jul 31, 2019, 10:38 AM IST

सीतामढ़ी. पानी बच्चों को लुभाता है। उसमें खेलने में उन्हें आनंद आता है। स्कूल खुला हो तो पानी पार करना बच्चों की मजबूरी भी होती है। पानी जानलेवा बन जाता है। लिहाजा कुछ न कुछ तो करना ही होगा। सरकार के राहत व बचाव कार्यों में तमाम निर्देश शामिल हैं। अब उसमें एक और निर्देश शामिल किया जाना समय की मांग है और वह यह है कि बाढ़ वाले इलाकों में ध्वनि विस्तारक यंत्र से प्रचार किया जाए कि बच्चों को पानी से दूर रखें। जागरूकता इसलिए जरूरी है कि अब तक राज्य की बाढ़ में डूबने वालों में ज्यादा बच्चे ही हैं। जहां बाढ़ है वहां कम से कम स्कूलों तो बंद होना ही चाहिए। 

 

सर्वाधिक प्रभावित सीतामढ़ी जिले को ही ले तो यहां 6 से 8 साल के बच्चे कमर भर पानी में होकर पढ़ने जाते हैं क्योंकि स्कूल खुले हैं। डीएम डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने सभी सरकारी एवं निजी स्कूल को 27 जुलाई तक बंद करने का आदेश दिया था। 28 जुलाई से सभी स्कूल खुल गए। यह तब है जब स्थिति सामान्य नहीं हुई है। जिले के परसौनी मैलवार पंचायत के वार्ड नं. 15 के नीलामी टोला का सड़क संपर्क भंग है। सड़क करीब 50 मीटर में ध्वस्त है। सीओ मो. एजाजुद्दीन कहते है कि वह स्थिति से अवगत है। लोगों को कहा गया है कि गहरे पानी में न जाएं। स्कूल जाने के समय सावधानी बरतें। राज्य के 13 जिलों के 111 प्रखंडों की 1269 पंचायतों की 88,46,920 आबादी बाढ़ से प्रभावित हैं। 

 

कुछ कीजिए सरकार 
बाढ़ पीड़ित इलाकों में स्कूली बच्चे नदी-नहर पार कर स्कूल जाने को विवश हो रहे हैं। चिंता का विषय यह है कि बाढ़ में डूबने से हुई 130 मौतों में अधिक नौनिहालों ही हैं। क्या सरकार या स्कूल प्रबंधन इन बच्चों की जान बचाने के लिए कोई उपय खोज सकते हैं। और कुछ नहीं तो स्कूल प्रबंधन अविभावकों से बात कर नाले पार कर स्कूल जा रहे बच्चों पर कोई ठोस निर्णय लें। चाहे स्कूल में छुट्‌टी करनी पड़े। हमें छात्र हित में कोई ठोस फैसला करना ही चाहिए। 

 

सरकार को कोई नीतिगत फैसला करना पड़े तो बेहिचक करना चाहिए। बाढ़ के दिनों में स्कूल संचालक अपने स्कूल कैलेंडर पर भी पुर्नविचार कर सकते हैं। बाढ़ बचाव में खाना और मुआवजा बांटने के साथ बच्चों का जीवन बचाना भी हमारा टास्क है। अभिवावकों के साथ सामाजसेवी संस्थाएं भी स्कूली बच्चों की मदद में आग आएं तो हम बच्चों को जीवन बचा सकते हैं। 

 

बाढ़ से अबतक हुई है 130 मौतें

  • शिवहर 10 
  • सीतामढ़ी 37 
  • पू.चंपारण 02 
  • मधुबनी 30 
  • अररिया 12 
  • किशनगंज 07 
  • सुपौल 04 
  • दरभंगा 14 
  • मुजफ्फरपुर 04 
  • सहरसा 01 
  • पूर्णियां 09 

( आंकड़े 30 जुलाई 2019 तक) 

 

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