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गया और कानपुर में बने तिलकुट की खूब हो रही बिक्री, शुगर फ्री तिलकुट की भी डिमांड

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 04:35 AM IST

Muzaffarpur News - मकर संक्रांति को लेकर तिलकुट की खुशबू से बाजार महक उठा है। हर चौक-चौराहे पर तिलकुट की दुकानों पर लोग खरीदारी करते...

Muzaffarpur News - gaya and plenty of salt made in kanpur demand of sugar free tilak
मकर संक्रांति को लेकर तिलकुट की खुशबू से बाजार महक उठा है। हर चौक-चौराहे पर तिलकुट की दुकानों पर लोग खरीदारी करते दिखे। शहर में बने गया के तिलकुट के साथ ही शुगर फ्री तिलकुट की भी जमकर बिक्री हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल तिल के दाम में वृद्धि के कारण तिलकुट की कीमत में भी 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। बावजूद इसके ठंड में तिलकुट का बाजार गर्म है। डायबिटीज मरीजों का ख्याल कर शुगर-फ्री तिलकुट बाजार में लाया गया है। पिछले कुछ दिनों से तिलकुट की बिक्री ज्यादा रही। लेकिन, पर्व को देखते रविवार को तिल लाई में भी तेजी रही। मोतीझील, कल्याणी, सरैयागंज, अघोरिया बाजार, कलमबाग चौक, हरिसभा चौक, पानी टंकी चौक से लेकर विभिन्न चौक-चौराहे पर तिलकुट की दुकानों पर देर शाम भीड़-भाड़ रही। खास बात यह है कि पैकेट में कानपुर के तिलकुट की बिक्री हो रही है। लेकिन, पॉलीथिन में आधा किलो और एक किलो के पैकेट को गया का तिलकुट बताया जा रहा है। अच्छी क्वालिटी होने के कारण गया का तिलकुट पूरे बिहार में प्रसिद्ध है। वैसे तो दुकान के पास ही तिलकुट बनाकर बेचे जा रहे हैं। लेकिन, दुकानदार यह बताते हैं कि गया के कारीगरों से इसे बनवाया गया है। यहीं तिलकुट बनाने के बाद भी कुछ वर्षों से कई किस्म और उत्तम क्वालिटी के तिलकुट मिलने लगे हैं। सर्दी में तिल खाना स्वास्थ्य और वैज्ञानिक दृष्टि से अच्छा माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन तिल खाने और दान की परंपरा रही है।

तिल के दाम में वृद्धि के कारण तिलकुट की कीमत में पिछले वर्ष की अपेक्षा 20 प्रतिशत तक की वृद्धि

मकर संक्रांति को लेकर गुड़ की खरीदारी करते लोग।

तिलकुट की किस्म कीमत

खोआ तिलकुट 350 रुपए किलो

गजक 250 रुपए किलो

रेवड़ी 200 रुपए किलो

गुड़ तिलकुट 250 रुपए किलो

तिल लाई 200 रुपए किलो

दूध-दही की नहीं होगी किल्लत, पिछले वर्ष से 8% ज्यादा दूध व 20% अधिक दही की होगी आपूर्ति

मुजफ्फरपुर | मकर संक्रांति के अवसर पर सुधा डेयरी 3 लाख लीटर दूध की आपूर्ति करेगी। 3 लाख किलोग्राम दही की भी आपूर्ति शहर में करने की तैयारी की गई है। तिमुल के प्रभारी प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि मकर संक्रांति में दही-चूड़ा खाने की परंपरा है। इसकी कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। 14 जनवरी और 15 जनवरी दोनों दिन दूध और दही की किल्लत नहीं होगी। रविवार को 2 लाख 70 हजार लीटर दूध की सप्लाई हुई। जबकि सोमवार को 2 लाख 6 हजार लीटर से अधिक दूध की आपूर्ति की जाएगी। गत वर्ष मकर संक्रांति के दो दिन पहले 2 लाख 53 हजार एवं एक दिन पहले 1 लाख 74 हजार लीटर दूध की सप्लाई हुई थी। दही भी गत वर्ष से 13 टन ज्यादा कुल 83 टन दही की आपूर्ति होगी। सोमवार को 25 टन आपूर्ति होगी। इसे लेकर मिल्क पार्लर पर रविवार को भी भीड़ लगी रही। सोमवार को भी यही हाल रहेगा।

तिल और चूड़ा लाई की भी आज बिक्री रही : तेज

हरिसभा रोड स्थित एक तिलकुट दुकानदार ने बताया कि मकर संक्रांति को लेकर गुड़, चीनी, खोवा, रेवड़ी, तिलपट्टी, चूड़ा का लाई और तिल के सभी सामान की बिक्री अच्छी है।

मकर संक्रांति के अवसर पर तिल-गुड़ के व्यंजन खाने के पीछे है वैज्ञानिक आधार

मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ खाने के पीछे वैज्ञानिक आधार भी है। तिल व गुड़ के व्यंजन सर्दी के मौसम में हमारे शरीर में आवश्यक गर्मी पहुंचाते हैं। तिल में तेल की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। जिसका सेवन करने से शरीर में पर्याप्त मात्रा में तेल पहुंचता है और जो हमारे शरीर को गर्माहट देता है। इसी प्रकार गुड़ की तासीर भी गर्म होती है। तिल व इसका तेल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मददगार है। दिल की बीमारी दूर करने में भी सहायक है। तिल में मौजूद मैग्निशियम डायबिटीज के होने की संभावना को भी दूर करता है। फाइबर होने की वजह से तिल खाना पाचन क्रिया को सही रखता है और कब्ज की समस्या भी दूर होती है। तिल में कॉपर, मैग्नीशियम, ट्राइयोफान, आयरन, मैग्नीज, कैल्शियम, फास्फोरस, जिंक, विटामिन बी 1 और रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

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