आईएएस के परिजनों से भी टेलीफोन कर मांगी रंगदारी

Muzaffarpur News - सीतामढ़ी मेन रोड के रेडियो अस्पताल के समीप 26 नवंबर को बमकांड को अंजाम देने के बाद टाइगर नवाब का संपर्क नेपाल में...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 09:01 AM IST
Muzaffarpur News - ias relatives also asked for extortion by telephone
सीतामढ़ी मेन रोड के रेडियो अस्पताल के समीप 26 नवंबर को बमकांड को अंजाम देने के बाद टाइगर नवाब का संपर्क नेपाल में आईएसआई सरगना मिर्जा दिलशाद बेग से हुआ। फिर वह अंडरवर्ल्ड सरगना दाउद इब्राहिम समेत मेनन बंधुओं के संपर्क में आया। उसके बाद वह उत्तर बिहार में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का जाल बिछाने लगा।

टाइगर नवाब एनकाउंटर

सीतामढ़ी मेन रोड के रेडियो अस्पताल के समीप 26 नवंबर (1998) को बमकांड को अंजाम देने के बाद टाइगर नवाब का संपर्क नेपाल में आईएसआई सरगना मिर्जा दिलशाद बेग से हुआ। फिर वह अंडरवर्ल्ड सरगना दाउद इब्राहिम समेत मेनन बंधुओं (याकूब मेनन) के संपर्क में आया। उसके बाद वह उत्तर बिहार में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का जाल बिछाने लगा। इसके साथ ही उसने रेशम, अवैध हथियार व जाली नोटों की तस्करी को भी अंजाम देने लगा। तब राज्य की कई गुप्तचर एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर निगाह रखने लगी। उसे आईएसआई के सक्रिय सदस्य के रूप में चिह्नित की। साथ ही दरभंगा के पतलू मियां और जुम्मन खान को टाइगर नवाब के प्रमुख साथी के रूप में पहचान कर उसकी संदिग्ध गतिविधियों के बारे में समय-समय पर सरकार को अवगत कराने लगी।

कहते हैं कि रेडियो अस्पताल के समीप बमकांड को अंजाम देने के बाद नवाब आईएसआई के कार्यों से दिल्ली चला गया। राज्य की खुफिया एजेंसी उसकी एक-एक गतिविधियों पर नजर रख रही थी। खुफिया रिपोर्ट पर सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर की पुलिस उसे दिल्ली से दबोच लाई। मुजफ्फरपुर पुलिस को जनता दल के जिला उपाध्यक्ष मो. शोएब हत्याकांड में उसकी तलाश थी। गिरफ्तारी के बाद हत्याकांड के बारे में नवाब से पूछताछ कर उसे सीतामढ़ी पुलिस को सौंप दिया गया। वहां की पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मगर, टाइगर नवाब जून 2001 में जेल से छूट कर पुन: बाहर आ गया। जेल से छूटने पर उसने विद्या विहार (सीतामढ़ी) के रहने वाले 1987 बैच के आईएएस अधिकारी चितरंजन कुमार खेतान के परिजनों को टेलीफोन कर रंगदारी मांगी। उनका बड़ा भाई प्रमोद कुमार खेतान दवा व्यवसायी हैं।

आईएएस के बारे में जानने के बाद भी वह रंगदारी के लिए बारबार उनके घर टेलीफोन कर धमकी देने लगा। परिवार वाले चिंतित रहने लगे। क्योंकि उसके नाम से सारा शहर खौफजदा था। बावजूद इसके तीसरी बार जब नवाब का फोन आया, तब संयोग से आईएएस की भाभी (प्रमोद खेतान की प|ी) उमा खेतान ने उसे रिसीव कर लिया। उन्होंने पूछा, ‘किस बात की रंगदारी… आप जानते नहीं कि हम कौन हैं… क्या आपने कमा कर रखा है… एक फुटी कौड़ी भी नहीं देंगे…!’ इस पर टाइगर ने धमकाया, ‘हम सब जानते हैं… अगर पैसा नहीं मिला तो तुम्हारे पति को गोली मार देंगे… तब तुम सब बारात में शामिल हो जाना…।’ ‘अरे जा… बड़ा आया गोली मारने वाला…।’ इतना कह कर उमा खेतान फोन रख दी। टाइगर नवाब के इरादों के प्रतिकार की यह पहली घटना थी, जब किसी महिला ने उसे चुनौती दी थी। अंतत: वह इस परिवार से रंगदारी नहीं ले सका।

सुजीत कुमार ‘पप्पू’

कल पढ़िए : सादी वर्दी में मंडराती पुलिस ने नवाब के गुर्गों को दबोचा।

किस्त : 11

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