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महज 4 लाख में ही स्तरीय टर्फ विकेट का होता निर्माण फिर भी बीआरए बिहार विवि के किसी कॉलेज में नहीं

एक वर्ष पहले
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80 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा यानी 800 वर्गफीट वाला क्रिकेट का एक आदर्श टर्फ विकेट (पिच) के नि‍र्माण के लिए बमुश्किल 4 लाख रुपये का खर्च आता है। लेकिन, बीआरए बिहार विवि समेत इसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले 56 कॉलेजों व 22 पीजी विभागों में कहीं भी ऐसी सुविधा छात्र-छात्राओं को मयस्सर नहीं है। यह तो बात हुई केवल क्रिकेट की। लेकिन एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, चेस, वॉलीबॉल से लेकर खो-खो व कबड्डी सरीखे अन्य खेलों में भी विवि की स्थिति खस्ताहाल है। वहीं सत्र 2019-20 में टीडीसी पार्ट वन में नामांकन के एवज में स्टूडेंट्स ने केवल स्पोर्ट्स मद में 1 करोड़ एक लाख 60 हजार से अधिक राशि दी है। इससे विवि और 6 जिलों में फैले इसके कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों की प्रतिभा मैदान में ही दम तोड़ रही है। बड़ा सवाल यह है कि ऐसे में खेलो इंडिया का सपना विवि के स्टूडेंट्स व खिलाड़ी कैसे पूरा कर सकेंगे। विवि के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 39 अंगीभूत कॉलेजों में छात्रों को खेलने के लिए टर्फ विकेट तो सपना है ही उन्हें तो साफ-सुथरा मैदान तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यह तो बात हो गई कॉलेजों की। लेकिन विवि के पास न तो अपना खेल का मैदान है और न हीं इंडोर स्टेडियम। अंतर कॉलेज प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए इसे कॉलेजों पर निर्भर रहना पड़ता है। जिला क्रिकेट संघ के उपाध्यक्ष डॉ राजेश कुमार कहते हैं कि खिलाड़ियों को कम से कम टर्फ विकेट की सुविधा तो मिलनी ही चाहिए। राज्यस्तरीय व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए यह निम्नतम जरूरत है। इसमें बहुत ज्यादा खर्च भी नहीं आता है।

पार्ट वन के नामांकन में छात्र-छात्राओं से विवि ने वसूली 1.60 करोड़ 60 हजार से अधिक राशि

खेलो इंडिया के लिए बिहार व झारखंड के सभी विवि को मिलाकर केवल दो विवि ही क्वालीफाई कर सके थे। इसमें रांची विवि और बीआरएबीयू की महिला फुटबॉल टीम ही शामिल थी। विवि की महिला टीम को सुविधा और ट्रेनिंग के नाम पर कैंप तक नहीं कराया जाता है। आधारभूत संरचना विकसित नहीं होने से इसे अंतर विवि खेलकूद प्रतियोगिता की मेजबानी नहीं मिलती है। बीआरएबीयू से इसका प्रस्ताव ही नहीं भेजा जाता है। चार वर्ष पहले 9.40 लाख से खरीदे गए सामान आज भी एकेडमिक स्टाफ कॉलेज में जमीन पर सड़ रहे हैं।


एकलव्य प्रतियोगिता में ऐसी रही विवि की स्थिति

टीएमबीयू भागलपुर की अगुआई में संपन्न एकलव्य प्रतियोगिता में बीआरए बिहार विवि को ओवरऑल पांचवां स्थान मिला। इसमें विवि को 3 गोल्ड, 6 रजत व 2 ब्रॉन्ज समेत कुल 11 पदक हासिल किए। विवि की क्षमता के अनुसार इसका टॉप-3 में आना तय माना जा रहा था।

बात चाहे अंतर विवि प्रतियोगिता की हो या ईस्ट जोन इंटर यूनिवर्सिटी समेत अन्य प्रतियोगिता की। इसके टीम में खेलने वाले खिलाड़ी वही जाने-पहचाने 8-10 कॉलेजों से ही सभी वर्ष चुने जाते हैं। वहीं कुछ खेलों में खास कॉलेजों के खिलाड़ियों व चयनकर्ताओं का दबदबा होता है।

हर वर्ष महज 8-10 कॉलेजों से ही चुनी जाती है टीम


हर वर्ष छात्रों से शुल्क वसूल प्रतियोगिता के नाम पर छात्रों को दिखाते हैं ठेंगा

कॉलेजों में हर वर्ष नामांकन पर प्रति छात्र 80 रुपये वसूला जाता है। इसमें 55 रुपये कॉलेज अपने कोटे में रखते हैं। बदले मे उन्हें कम से कम वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का ही आयोजन करना चाहिए। लेकिन, कुल मिला कर 56 कॉलेजों में दर्जन भर कॉलेजों में ही खेलों का आयोजन होता है। कई कॉलेजों के पास तो दिखाने के लिए भी मैदान नहीं है। एमपीएस साइंस कॉलेज के छात्र नीतेश ने बताया कि पैसा तो लिया जाता है। लेकिन, आयोजन के नाम पर छात्रों को ठेंगा दिखाया जाता है। छात्रसंघ भी इसमें कुछ नहीं कर पा रहा है।


खेलो इंडिया के लिए बिहार-झारखंड से विवि की महिला फुटबॉल टीम ने किया क्वालीफाई


छात्रों से वसूली राशि की जांच को विवि ने बनाई 3 सदस्यीय कमेटी

विवि ने कॉलेजों में नामांकन के नाम पर स्पोर्ट्स मद में छात्रों से कराेड़ाें रुपये की वसूली की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी के सदस्य छात्र कल्याण अध्यक्ष, प्रॉक्टर एवं विश्वविद्यालय गणित विभाग के अध्यक्ष हाेंगे। शुक्रवार काे छात्र कल्याण अध्यक्ष डाॅ. अभय कुमार की अध्यक्षता में हुई स्पोर्ट्स कमेटी की बैठक में इसका निर्णय लिया गया। बैठक में स्पोर्ट्स काउंसिल के सचिव डाॅ. अखिलेश डाेगरा काे भी बुलाया गया था। उनसे भी काॅलेजों में खेल संबंधित इवेंट नहीं हाेने के बारे में जानकारी ली गई। बताया जाता है कि विवि काे बताया गया कि सेशन लेट हाेने के कारण लगातार परीक्षाएं हाेने से खेल के आयोजन नहीं हाे सके। छात्र कल्याण अध्यक्ष ने कहा कि 56 अंगीभूत एवं संबद्ध काॅलेजों की जांच की जाएगी कि कहां कितने आयोजन हुए, कितनी राशि मिली अाैर कितने खर्च हुए। सभी प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे खेल मद की राशि के आय-व्यय का ब्योरा दें।


विवि गोल्ड सिल्वर ब्राॅन्ज कुल


टीएमबीयू 15 07 07 29

वीकेएसयू 06 06 03 15

एलएनएमयू 03 07 04 14

मगध विवि 05 03 03 11

बीअारएबीयू 03 06 02 11

पाटलिपुत्र विवि 03 03 02 08

पटना विवि 02 03 01 06

मुंगेर विवि 00 02 04 06

बीएनएमयू 00 01 03 04

जेपी विवि 00 02 01 03

पूर्णिया विवि 00 00 02 02

केएसडी विवि 00 01 00 01
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